बनर्जी ने चुनावों के दौरान मुफ्त सामग्री बांटने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसे अनुशासित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा, अब इस खेल से बाहर निकलना कठिन हो गया है।
नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी का कहना है कि चुनाव से पहले मुफ्त सुविधाएं देना गरीबों की मदद करने का सबसे अच्छा तरीका नहीं है और इसे अनुशासित करने की आवश्यकता है।
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अर्थशास्त्री व लेखिका श्रायन भट्टाचार्य द्वारा संचालित एक चर्चा 'गुड इकोनॉमिक्स, बैड इकोनॉमिक्स' में हिस्सा लेते हुए बनर्जी ने विकासात्मक अर्थशास्त्र, अर्थव्यवस्था के व्यावहारिक मॉडल, जीवन संकट की लागत, सामाजिक सुरक्षा, वितरण प्रभाव जैसे प्रासंगिक मुद्दों पर बात की।
बनर्जी ने चुनावों के दौरान मुफ्त सामग्री बांटने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसे अनुशासित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा, अब इस खेल से बाहर निकलना कठिन हो गया है। पारंपरिक और विषमतावादी तरीका ऋण बट्टे को खाते में डालना था, क्योंकि सबसे बड़े कर्जदार गरीब नहीं हैं। वह आसान तरीका था।
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अर्थशास्त्री ने एक समाधान की पेशकश करते हुए कहा कि अमीरों पर टैक्स लगाना अच्छा तरीका है। लेकिन चुनाव से पहले सस्ते में सामग्री वितरित करना गरीबों की मदद करने का सबसे अच्छा तरीका नहीं है। हमारे पास गुब्बारे के समान असमानता है और अमीरों पर टैक्स लगाने का तर्क एक मजबूरी है।