तोगड़िया ने इसके लिए सीधे प्रधानमन्त्री और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने मोहन भागवत पर राममंदिर मुद्दे पर दोहरा रुख अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के बनने के बाद मन्दिर निर्माण के लिए उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से सम्पर्क किया था।
पहले तो उन्हें कुछ दिन चुप रहने के लिए कहा गया था, लेकिन बाद में भागवत ने इस मुद्दे पर अपना रुख बदल लिया। तोगड़िया के मुताबिक अब आरएसएस को राममंदिर की याद महज इसलिए आ रही है क्योंकि चुनाव आने वाले हैं जिसमें भाजपा की स्थिति बेहद नाजुक है।
हालांकि खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में सरकार से मंदिर बनाने के लिए संसद में कानून बनाने की मांग की है। इसके बाद आरएसएस के ही एक अन्य नेता इन्द्रेश कुमार ने शुक्रवार को सरकार से इस मुद्दे पर अध्यादेश लाने की भी मांग की है।
5 अक्टूबर को दिल्ली में हुई सन्तों की विशेषाधिकार समिति की बैठक में भी सरकार से इस मुद्दे पर कानून बनाने की मांग की गई थी। हालांकि भाजपा ने इस मुद्दे पर अभी तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही अपना आधार मानने की बात कही है जहां मन्दिर मुद्दे पर 29 अक्टूबर से अंतिम दौर की सुनवाई शुरू होनी है।