Pratima Bhoumik: त्रिपुरा की 'दीदी' बन सकती हैं राज्य की पहली महिला CM, जानें उनके बारे में सबकुछ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sat, 04 Mar 2023 04:56 PM IST
सार
केंद्र में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री प्रतिमा भौमिक 90 के दशक से त्रिपुरा में भाजपा का चेहरा बनी हुई हैं। साल 1991 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव
- फोटो : AMAR UJALA
पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। 33 सीटें जीतकर राज्य में भाजपा गठबंधन ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। नई सरकार के गठन की कवायदें भी शुरू हो गईं हैं। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को राज्यपाल सत्यदेव नारायण से मुलाकात करके अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नई सरकार के गठन पर कोई बात नहीं कही। इससे त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें बढ़ गईं हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा नेतृत्व महिला दिवस (8 मार्च) पर त्रिपुरा में केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक को मुख्यमंत्री बना सकता है। अगर ऐसा होता है तो भौमिक राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी।
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव
- फोटो : AMAR UJALA
पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। 33 सीटें जीतकर राज्य में भाजपा गठबंधन ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। नई सरकार के गठन की कवायदें भी शुरू हो गईं हैं। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को राज्यपाल सत्यदेव नारायण से मुलाकात करके अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नई सरकार के गठन पर कोई बात नहीं कही। इससे त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें बढ़ गईं हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा नेतृत्व महिला दिवस (8 मार्च) पर त्रिपुरा में केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक को मुख्यमंत्री बना सकता है। अगर ऐसा होता है तो भौमिक राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी।
प्रतिमा भौमिक
- फोटो : SOCIAL MEDIA
कौन हैं प्रतिमा भौमिक?
केंद्र में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री प्रतिमा भौमिक 90 के दशक से त्रिपुरा में भाजपा का चेहरा बनी हुई हैं। भौमिक एक किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह अपनी सामान्य जीवन शैली और जमीनी राजनीति के लिए जानीं जाती हैं। बताया जाता है कि भौमिक अपने शुरुआती दिनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति आकर्षित थीं। साल 1991 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। उन्होंने अगरतला के महिला कॉलेज से विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है।
भाजपा में शामिल होने के एक साल के भीतर, भौमिक को भाजपा त्रिपुरा राज्य समिति का सदस्य बना दिया गया। 1992 में उन्हें धनपुर मंडल का अध्यक्ष बनाया गया। पार्टी में सक्रियता के कारण भौमिक का कद बढ़ता ही गया। इसके बाद उन्होंने त्रिपुरा राज्य भाजपा महिला मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वह दो बार भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहीं।
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पिछले विधानसभा चुनाव से पहले मिली बड़ी जिम्मेदारी
2018 विधानसभा चुनावों से पहले, प्रतिमा भौमिक को भाजपा त्रिपुरा महासचिव के रूप में बड़ी जिम्मेदारी मिली। अगले साल 2019 में, पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया। उन्होंने पश्चिम त्रिपुरा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और 3 लाख से अधिक मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भौमिक त्रिपुरा की पहली महिला भाजपा सांसद बन गईं।
प्रतिमा भौमिक
- फोटो : ANI
मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में बनीं मंत्री
जुलाई 2021 वो समय आया जब उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। भौमिक केंद्रीय मंत्री बनने वाली त्रिपुरा की पहली महिला बनीं। इसके अलावा भौमिक त्रिपुरा में भाजपा की पहली सांसद हो गईं जिन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया।
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पीएम मोदी के साथ प्रतिमा भौमिक
- फोटो : Agency (File Photo)
2023 त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में मैदान में उतरीं, दर्ज की जीत
इसी साल जनवरी में जब त्रिपुरा विधानसभा चुनावों की शुरुआत हुई तो भाजपा ने केंद्रीय मंत्री को धनपुर सीट से उतारकर सबको चौका दिया। धनपुर, सीपीएम का गढ़ हुआ करता था जहां पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार पिछले 50 वर्षों से सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस चुनाव में भौमिक ने कुल 42.25 फीसदी वोट शेयर के साथ कुल 19,148 वोट हासिल किए। उन्होंने माकपा के उम्मीदवार कौशिक चंदा को 3,500 वोटों से हरा दिया।
प्रतिमा भौमिक
- फोटो : ANI
महिलाओं के लिए दीदी हैं
केंद्रीय मंत्री पूरे त्रिपुरा में अपनी सरल जीवन शैली और जमीनी स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। किसान परिवार से आने वाली, भौमिक को महिलाएं 'दीदी' कहकर बुलाती हैं। भौमिक राज्य की पारंपरिक कला और संस्कृति को बढ़ावा देने में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल रहती हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में, वह राज्य में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के समर्थन में भी मुखर रही हैं।