राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के दूसरे मसौदे को लेकर देशभर में बवाल जारी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त एनआरसी के अध्यक्ष प्रतीक हजेला ने कहा है कि नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर के पूरा होने के लिए 31 दिसंबर की समयसीमा जैसी कोई बात नहीं है, क्योंकि इस संबंध में किसी भी समयसीमा के निर्धारण का निर्देश सिर्फ सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा हाल ही में जारी की गई 'राष्ट्रीय रजिस्टर के पूरा होने के लिए 31 दिसंबर की समयसीमा' वाली अधिसूचना कोई पत्थर की लकीर नहीं है। इसे पूरी तरह से बजट के उद्देश्य के लिए अधिसूचित किया गया है।
उन्होंने कहा कि असम में नागरिकों की सूची बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी है। हालांकि जिनका नाम इस सूची में नहीं है उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाएगा।
प्रतीक हजेला ने कहा कि एनआरसी की सूची से बाहर किए गए लोगों को अपना जवाब देने की आखिरी तारीख 28 सितंबर दी गई है। इसके बाद ही अंतिम सूची जारी की जाएगी। उन्होंने कहा 'हालांकि इस मामले में जब तक सुप्रीम कोर्ट कोई समय सीमा तय नहीं कर देता है तब तक कोई भी सूची प्रकाशित नहीं की जाएगी।'