पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि समाज और देश को आगे ले जाने के लिए बातचीत बहुत जरूरी है। बिना संवाद के लोकतंत्र नहीं चल सकता है। हमें बांटने वाले विचारों की पहचान करनी होगी। हो सकता है कि हम दूसरों से सहमत हो और नहीं भी हों लेकिन किसी भी सूरत में विचारों की विविधता और बहुलता को नहीं नकार सकते हैं।
खुशहाली सूचकांक में पीछे क्यों
मुखर्जी ने सवाल उठाया कि आर्थिक मोर्चे पर शानदार उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद खुशहाली सूचकांक (हैपीनेस इंडेक्स) में हम 133वें नंबर पर क्यों हैं। इस मामले में प्रगति करने के लिए हमें कौटिल्य को याद करना चाहिए, जिनका एक संदेश संसद के गेट नंबर छह पर लिखा है। इसमें कहा गया है कि जनता की खुशी में ही राजा की खुशी है। विदेशी शासन के कारण लंबे समय तक हम दर्द में जिए हैं, लेकिन अब हमें शांति, सौहार्द्र और खुशी फैलाने के लिए संघर्ष करना चाहिए।