घटना 1978 की है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इंदिरा जी को उनके 100वें जन्मदिन पर व्याख्यान में याद करते हुए बताई। उस दिन प्रणब दा असम में चुनाव प्रचार के दौरान इंदिरा जी के साथ थे। इंदिरा जी को चाय की बुरी तरह से तलब लगी। उन्होंने अपनी इच्छा प्रणब दा से जाहिर की।
ढाबे का था हाल बुरा
प्रणब दा के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंदिरा जी को चाय पिलवाने की ही थी, क्योंकि आस पास कोई ऐसी जगह नहीं दिखाई दे रही थी, जहां इस तलब को पूरा कर पाते। एक ढाबा भी दिखाई दिया, तो धूल और गंदगी से भरा बुरे हाल में था।
याद आया कांग्रेसी बागान मालिक
अचानक प्रणब दा को याद आया कि पास में ही एक चाय का बागान मालिक रहता है। उसके चाय के बागान भी हैं और उसका बंगला भी नजदीक ही है। क्यों न उसके यहां चलकर चाय की तलब पूरी कर ली जाए। प्रणब दा ने इंदिरा जी से अपनी इच्छा बताई और कहा कि पास में चाय के बागान के मालिक का बंगला है। वह कांग्रेस समर्थक भी है। क्यों न वहीं चाय पी ली जाए।