मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने लोकसभा में बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) संबंधी अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का मकसद देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आरक्षण की व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। यूजीसी के स्थान पर प्रस्तावित नई संस्था स्वतंत्र होगी।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सुगत बोस, सौगत रॉय और असदुद्दीन ओवैसी के प्रश्नों के जवाब में जावड़ेकर ने कहा कि यूजीसी अब तक अनुदान एवं प्रशासनिक दोनों तरह का काम करती आई है और सरकार इसके काम को दो हिस्सों में बांटना चाहती है। एक हिस्सा अनुदान का होगा और दूसरा नियमन का होगा।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि यूजीसी की जगह पर आने वाली नई संस्था का संचालन नौकरशाह नहीं बल्कि शिक्षाविद करेंगे। यह स्वतंत्र संस्था होगी। जावड़ेकर ने कहा कि संशोधन विधेयक का जो मसौदा सार्वजनिक रूप से रखा गया था उसमें और पेश किए जाने वाले विधेयक में बहुत फर्क होगा क्योंकि इसमें बहुत सारे सुझावों को जोड़ा गया है।
जावड़ेकर ने यह भी कहा कि इस प्रस्तावित संशोधन से उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी के लिए तय आरक्षण में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले 10 वर्षों के दौरान विश्व स्तर के 20 विश्वविद्यालय तैयार करना है।