केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इन दिनों कर्नाटक को लेकर काफी व्यस्त हैं। अपने काम में किसी तरह की कोताही न बरतने वाले जावड़ेकर का मानना है कि जिम्मेदारी को हमेशा सफलता में बदल देना चाहिए। वह कर्नाटक राज्य के प्रभारी हैं और गुजरात तथा हिमाचल विधानसभा चुनाव का नतीजा आने के बाद से बेहद संवेदनशील हैं।
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लिहाजा कर्नाटक में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर भरपूर समय दे रहे हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जमीनी नेता है। जनाधार रखते हैं। हालांकि सिद्धारमैया सरकार के सामने सत्ता विरोधी स्थिति की भी चुनौती है।
वहीं भाजपा ने अपने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को चेहरा बनाकर राज्य में कमान सौंपी है। लिंगायात समुदाय पर अच्छी पकड़ रखने वाले येदियुरप्पा भी जमीनी नेता है। अच्छा जनाधार रखते हैं। वह भाजपा के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपने बल पर राज्य में कमल खिलाया था। लेकिन आपसी गुटबाजी और फिर भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
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भाजपा को उनके दौर में सत्ता में आने के बाद से तीन बार मुख्यमंत्री बदलना पड़ा था। इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने भाजपा छोडक़र नई पार्टी बना ली था और 2014 में वह फिर लौटकर भाजपा में आए हैं। ऐसे में प्रकाश जावड़ेकर के लिए राज्य के भाजपा नेताओं की गुटबाजी पर नियंत्रण रखकर सत्ता में वापसी की राह बनाना बहुत आसान नहीं होगा।