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गुजरात और हिमाचल प्रदेश के नतीजों के बाद बीजेपी की अगली मंजिल है कर्नाटक

Sun, 24 Dec 2017 02:43 PM IST
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
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केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इन दिनों कर्नाटक को लेकर काफी व्यस्त हैं। अपने काम में किसी तरह की कोताही न बरतने वाले जावड़ेकर का मानना है कि जिम्मेदारी को हमेशा सफलता में बदल देना चाहिए। वह कर्नाटक राज्य के प्रभारी हैं और गुजरात तथा हिमाचल विधानसभा चुनाव का नतीजा आने के बाद से बेहद संवेदनशील हैं।
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 लिहाजा कर्नाटक में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर भरपूर समय दे रहे हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जमीनी नेता है। जनाधार रखते हैं। हालांकि सिद्धारमैया सरकार के सामने सत्ता विरोधी स्थिति की भी चुनौती है। 

वहीं भाजपा ने अपने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को चेहरा बनाकर राज्य में कमान सौंपी है। लिंगायात समुदाय पर अच्छी पकड़ रखने वाले येदियुरप्पा भी जमीनी नेता है। अच्छा जनाधार रखते हैं। वह भाजपा के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपने बल पर राज्य में कमल खिलाया था। लेकिन आपसी गुटबाजी और फिर भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
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भाजपा को उनके दौर में सत्ता में आने के बाद से तीन बार मुख्यमंत्री बदलना पड़ा था। इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने भाजपा छोडक़र नई पार्टी बना ली था और 2014 में वह फिर लौटकर भाजपा में आए हैं। ऐसे में प्रकाश जावड़ेकर के लिए राज्य के भाजपा नेताओं की गुटबाजी पर नियंत्रण रखकर सत्ता में वापसी की राह बनाना बहुत आसान नहीं होगा।
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भाजपा का है पूरा जोर

पंजाब के बाद कर्नाटक ही वह बड़ा राज्य है, जहां कांग्रेस की सरकार है। कर्नाटक केरल और तमिलनाडु से सटा है। ऐसे में दक्षिण भारत में मजबूत पकड़ बनाने के लिए भाजपा के लिए सत्ता की सीढ़ी है। इसलिए भाजपा सत्ता में वापसी के लिए भरपूर जोर लगा रही है। 

नवंबर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कर्नाटक में 75 दिन की यात्रा का शुभारंभ कर दिया था। पार्टी की योजना नये साल के पहले महीने में एक बड़ी जनसभा के आयोजन की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसे संबोधित करेंगे। इसके साथ ही वहां जोरदार प्रचार अभियान आरंभ हो जाने की उम्मीद है। 

इसलिए मानव संसाधन विकास मंत्री सहयोगी मुरलीधर राव के साथ मिलकर पार्टी की राह आसान बनाने में लगे हैं। जावड़ेकर मझे हुए राजनेता हैं। उन्हें पता है कि फरवरी में संसद का बजट सत्र आरंभ हो जाएगा। अप्रैल 2018 तक राज्य में चुनाव प्रस्तावित है। इसलिए समय कम है। जबकि चुनौती बड़ी है। कांग्रेस से सत्ता छीननी है। इसलिए मंत्रालय के कामकाज से समय मिलते ही वह सीधे कर्नाटक का रुख कर लेते हैं।
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