भारत की अगुआई में आयोजित 13 देशों के बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति-2026’ का मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में सफल समापन हो गया। हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सैन्य सहयोग, सामूहिक सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस अभ्यास में 400 से अधिक सैनिकों ने हिस्सा लिया। अभ्यास में विभिन्न देशों की सेनाओं ने संयुक्त अभियानों के जरिए अपनी समन्वित युद्ध क्षमता और आतंकवाद रोधी कौशल का प्रदर्शन किया।
गुवाहाटी में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि ‘पार्टनरशिप ऑफ रीजनल आर्मीज फॉर ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन द इंडियन ओशन रीजन’ (प्रगति) के बैनर तले आयोजित इस अभ्यास में भारत, भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम के सैनिक शामिल हुए। बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास का यह पहला संस्करण था, जिसने क्षेत्रीय सैन्य सहयोग को नया आयाम दिया।
समापन समारोह में छह देशों के सेना उपप्रमुखों सहित 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया। भारतीय सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की और विभिन्न देशों के सैन्य अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रक्षा सहयोग और सैन्य संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा की।
अर्ध-पहाड़ी और जंगल क्षेत्र में आयोजित इस अभ्यास का मुख्य फोकस आतंकवाद रोधी अभियान रहा। सैनिकों ने मिश्रित टीमों में प्रशिक्षण लेते हुए एंबुश और काउंटर-एंबुश ड्रिल, रॉक क्राफ्ट, स्लिदरिंग, जंगल लेन शूटिंग, कमरे और बस में हस्तक्षेप अभियान, आईईडी की पहचान तथा घायलों की सुरक्षित निकासी जैसे अभियानों का अभ्यास किया। कठिन परिस्थितियों में साथ प्रशिक्षण लेने से विभिन्न देशों के सैनिकों के बीच आपसी समझ, विश्वास और पेशेवर समन्वय भी मजबूत हुआ।
रावत ने बताया कि अभ्यास के दौरान भारतीय सेना ने फिक्की और आर्मी डिजाइन ब्यूरो के सहयोग से स्वदेशी रक्षा उपकरणों और अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों की प्रदर्शनी भी आयोजित की। इसमें आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत विकसित रक्षा प्रणालियों और अगली पीढ़ी के सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना और रक्षा क्षेत्र में सहयोग तथा निर्यात को बढ़ावा देना था। रावत ने बताया कि ‘प्रगति-2026’ ने सहभागी देशों के बीच अंतरसंचालन क्षमता बढ़ाने, सामूहिक तैयारी को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभ्यास के पहले संस्करण की
सफलता ने भविष्य में इस पहल को और व्यापक स्वरूप देने की मजबूत नींव तैयार की है। साथ ही, इसने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए साझेदार देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है।