कोरोना की दूसरी खतरनाक लहर चैनल बचना है तो 'झटपट योगासनों' को करके आप इस संक्रमण से बच सकते हैं। यह झटपट योगासन कुछ और नहीं बल्कि 'पावर योगा' है। जिसके अंदर कई यौगिक क्रियाओं का मिश्रण है और चंद मिनट में होने वाली यौगिक क्रियाएं न सिर्फ हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं, बल्कि किसी भी तरीके के संक्रमण से लड़ने में शरीर का बचाव भी करती हैं।
अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ ने पूरे देश मे पावर योगा के माध्यम से कोरोना पर जीत के हजारों मरीज देखे हैं। महासंघ के प्रमुख योग गुरु मंगेश त्रिवेदी बताते हैं कि दरअसल पावर योगा कुछ और नहीं बल्कि कई यौगिक क्रियाओं का एक फ्यूजन वर्जन है। उनके मुताबिक पावर योगा में सूर्य नमस्कार की क्रियाओं समेत अधोमुखश्वासन समेत मर्कटासन समेत कई श्वसन की क्रियाएं भी इसमें शामिल हैं। योग गुरु मंगेश त्रिवेदी कहते हैं इन मिश्रित क्रियाओं को करने से न सिर्फ शरीर में स्टेमिना बढ़ता है बल्कि इम्यूनिटी भी बढ़ती है। जो किसी भी रोग से लड़ने में सक्षम होती है।
पूरे देश में यौगिक क्रियाओं के माध्यम से लोगों को निरोगी बनाने की प्रक्रिया में कार्यरत योग शिक्षक महासंघ ने न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया में पावर योगा के माध्यम से लोगों को निरोगी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग गुरु मंगेश त्रिवेदी कहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में जिस तरीके से पूरे देश और दुनिया में भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति और यौगिक क्रियाओं को बढ़ावा मिल रहा है, उससे कोरोना वायरस पर जंग जीतना आसान हो गया है। आयुर्वेदाचार्य डॉ राजीव कपिला कहते हैं कि यौगिक क्रियाएं हमारे फेफड़ों को मजबूत करती हैं। कोरोना का असर सबसे ज्यादा फेफड़ों पर पड़ता है और यही वजह है कि ये सांस की क्रियाएं कोरोना की जंग में सबसे ज्यादा कारगर हैं।
पूरी दुनिया में इस वक्त कोरोनावायरस के इलाज के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धति और यौगिक क्रियाओं का जबरदस्त बोलबाला है। अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के मुताबिक पूरी दुनिया में इस वक्त उनका संगठन यौगिक क्रियाओं के माध्यम से लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी पूर्व एशिया के कई मुल्कों में उनके योग शिक्षक ऑनलाइन पावर योगा और अन्य यौगिक क्रियाओं से लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। ताकि कोरोना जैसी घातक जानलेवा बीमारी में उनकी जान बचाई जा सके।
भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति और यौगिक क्रियाओं में भरोसा जताते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के साउथ ईस्ट एशिया रीजनल ऑफिस में आयुष मंत्रालय के साथ एक करार भी किया है। इस करार के तहत वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए आयुष मंत्रालय के अधीन आने वाली चिकित्सकीय पद्धतियों के कोरोना मरीजों पर किए गए उपचार और उसके लाभों को देखा जाएगा। ताकि वैज्ञानिक आधार पर भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति को दुनिया के सभी मुल्कों में स्थाई रूप से स्थापित किया जा सके।