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बिजली संकट : राज्यों की उदासीनता से बढ़ा, देनदारी नहीं चुकाने से समय रहते कोयले का स्टॉक नहीं कर पाए विद्युत संयंत्र

Thu, 05 May 2022 04:36 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

संकट के दूसरे कारण भी हैं। कोयला सचिव एके जैन के मुताबिक अर्थव्यवस्था में तेजी के कारण बिजली की मांग में बढ़ोत्तरी, गर्मी का तय समय से पहले दस्तक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयला और गैस की कीमतों में आसमान छूती बढ़ोत्तरी और आयातित कोयले पर निर्भर ताप विद्युत संयंत्रों में उत्पदान में आई गिरावट ने इस समस्या को गंभीर बना दिया है।
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बिजली कटौती - फोटो : Social Media
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विस्तार
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देनदारी चुकाने में राज्यों की उदासीनता और बिजली उत्पादन के दूसरे स्रोतों के संदर्भ में लापरवाही भरे रवैये ने देश में बिजली संकट को बहुत बड़ा कर दिया। देनदारी नहीं चुकाने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे ताप विद्युत संयंत्र समय रहते कोयले का स्टॉक नहीं कर पाए। जबकि गैस आधारित संयंत्रों पर ध्यान न देने के कारण न सिर्फ घरेलू कोयले पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, बल्कि इससे 4000 मेगावाट की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई।

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तीन राज्यों पर 7918 करोड़ बकाया
गौरतलब है कि अकेले महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल पर ही ताप विद्युत संयंत्रों का 7918 करोड़ रुपये का बकाया है। कैबिनेट सचिव के  एक नोट के मुताबित समय रहते बकाए का भुगतान न करने के कारण इन राज्यों से जुड़े संयंत्र जरूरी मात्रा में कोयले का स्टॉक नहीं कर पाए। रही सही कसर राज्यों की बिजली उत्पादन के दूसरे सा्रेतों के प्रति बरती गई लापरवाही ने पूरी कर दी।

उत्तराखंड, गुजरात और दिल्ली के कारण घरेलू कोयले पर पड़ा दबाव
समय से पूर्व गर्मी की दस्तक के बावजूद उत्तराखंड, दिल्ली और गुजरात ने गैस आधारित विद्युत निर्माण संयंत्र के साथ अग्रिम व्यवस्था नहीं की। इसके कारण गैस आधारित संयंत्र की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई। इससे ताप विद्युत संयंत्रों की ओर से घरेलू कोयले की मांग बढ़ गई। तीन राज्यों की लापरवाही के कारण गैस आधारित संयंत्र अपनी क्षमता के अनुरूप विद्युत उत्पादन नहीं कर पाए।
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क्षमता का आधा उत्पादन कर रहे कई बिजली संयंत्र
आयातित कोयले पर निर्भर संयंत्र क्षमता का आधा ही उत्पादन कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयला कई गुना महंगा होने के कारण ये संयंत्र भी घरेलू कोयला चाहते हैं। दूसरी ओर राज्य कम बिजली की भरपाई के लिए अधिक कोयला चाहते हैं। हालांकि अतिरिक्त कोयला भेजने का टर्न अराउंड समय दस दिनों का होता है, क्योंकि इसके लिए अतिरिक्त रैक की जरूरत पड़ती है।

संकट के यह भी कारण
संकट के दूसरे कारण भी हैं। कोयला सचिव एके जैन के मुताबिक अर्थव्यवस्था में तेजी के कारण बिजली की मांग में बढ़ोत्तरी, गर्मी का तय समय से पहले दस्तक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयला और गैस की कीमतों में आसमान छूती बढ़ोत्तरी और आयातित कोयले पर निर्भर ताप विद्युत संयंत्रों में उत्पदान में आई गिरावट ने इस समस्या को गंभीर बना दिया।

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