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Why Power Crisis In India: कोयले की कमी, ज्यादा मांग या राज्यों का बकाया? आखिर क्या है बिजली संकट के पीछे की असली वजह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Tue, 03 May 2022 09:19 AM IST

सार

17 मार्च 2022 को ऊर्जा मंत्री ने लोकसभा में कहा कि देश के बिजली घरों की कुल उत्पादन क्षमता 395.6 गीगावाट है। अधिकतम मांग केवल 203 गीगावाट रही है। मौजूदा संकट की वजह अचानक बढ़ी मांग को बताया गया। हालांकि, ये अधिकतम मांग 207.11 गीगावाट है। यानी, सरकार द्वारा बताई गई उत्पादन क्षमता 395.6 गीगावाट से काफी कम।
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बिजली संकट की वजह क्या है? - फोटो : अमर उजाला

कोयले की डिमांड और सप्लाई की क्या स्थिति है? 

29 अप्रैल को अधिकतम मांग 207.11 गीगावाट तक पहुंच गई। जो रिकॉर्ड थी। इस दिन देश में कुल 214 मिलियन यूनिट ऊर्जा की कमी रही। सबसे ज्यादा उत्तरी क्षेत्र में 156.5 मिलियन यूनिट ऊर्जा की कमी रही। यानी, इस इलाके में सबसे ज्यादा संकट रहा। यही, वो अंतर है जिसकी वजह से बिजली का संकट गहराया। हालंकि, 30 अप्रैल और एक मई को बिजली की डिमांड में कमी आई। इसके साथ ही डिमांड सप्लाई के अंतर में भी कमी आई। एक मई को तो ये डिमांड 200 गीगावाट से भी कम हो गई। 

ऊर्जा की डिमांड और सप्लाई के अंतर की वजह कोयले की सप्लाई नहीं हो पाने को बताया जा रहा है। इस अंतर को कम करने के लिए रेलवे ने 650 से ज्यादा यात्री ट्रेनों को रद्द करके मालगाड़ियों के फेरे बढ़ाए हैं, जिससे पॉवर प्लांट तक जल्द कोयला पहुंचाया जा सके। कोयले से बिजली पैदा करने वाले थर्मल पॉवर प्लांट में कम से कम 24 दिन के कोयले का स्टॉक होना चाहिए, लेकिन देश के कई सारे ऐसे प्लांट हैं जहां 10 दिन से भी कम का कोयला बचा है।

क्या आगे हालात और बिगड़ सकते हैं? 

बीते दो दिनों में बदले मौसम और डिमांड की कमी के कारण फिलहाल ये संकट थोड़ा कम हुआ है। हालांकि, आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के आसार हैं। इससे एक बार फिर मांग बढ़ेगी। ऐसे में कोयला कंपनियों से लेकर बिजली कंपनियों तक को इसके लिए तैयारी करनी होगी। देश में होने वाले कुल कोयला उत्पादन का 80 फीसदी कोल इंडिया करती है। रिकॉर्ड उत्पादन के बाद भी मांग और आपूर्ति का अंतर पट नहीं पा रहा है। इसे देखते हुए कोल इंडिया ने इस वित्त वर्ष में आपूर्ति को 4.6 फीसदी बढ़ाकर 565 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा है। बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली मंत्रालय ने कोयले का आयात बढ़ाकर 36 मिलियन टन करने को कहा है। जो पिछले छह साल में सबसे ज्यादा है। 

 छह महीने पहले भी तो इस तरह की संकट की बातें आई थीं वो किस वजह से थीं?

कोरोना की दूसरी लहर के बाद देश के इंडस्ट्रियल सेक्टर में बिजली की डिमांड बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। जबकि देश में कीमतें काफी कम थीं। इस अंतर की वजह से आयात की मुश्किलें बढ़ीं। उस वक्त कोल इंडिया ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने की वजह से हमें घरेलू कोयला उत्पादन पर निर्भर होना पड़ा है। डिमांड और सप्लाई में आए अंतर की वजह से ये स्थिति पैदा हुई। हालांकि, सर्दियों की शुरुआत के साथ हालात नहीं बिगड़े। उस संकट के वक्त बिजली की मांग और आपूर्ति में एक फीसदी का अंतर था। जबकि, बीते सात दिन में ही ये अंतर 1.4 फीसदी हो गया है। इस बार गर्मियों की शुरुआत में ऐसे हालात पैदा हुए हैं। आगे बिजली की मांग और बढ़ेगी। रूस-यूक्रेन युद्ध से स्थितियां और बिगड़ रही हैं। इस वजह से संकट गहराने की आशंका है।

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