भारत-रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में हुए अहम करार से चिंतित चीन निकट भविष्य में भारत के खिलाफ अपना कूटनीतिक अभियान और तेज कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कड़ी में चीन भारत के पड़ोसी देशों नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में अपनी सक्रियता बढ़ाने के लिए पूरी ताकत झोंकेगा। इसके अलावा वह एनएसजी में भारत के प्रवेश और जैश ए मोहम्मद के मुखिया मौलान मसूद अजहर को आतंकी घोषित कराने के भारत के प्रयास को विफल करने के अपने रुख पर डटा रहेगा।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ बने विश्वव्यापी माहौल में चीन के लिए पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति का माहौल बनाना फिलहाल कठिन होगा। जहां तक बांग्लादेश की बात है तो वहां सत्ता परिवर्तन के बाद ही चीन के अभियान को बल मिल सकता है।
दक्षिण एशिया मामलों केविशेषज्ञ और नेपाल-अफगानिस्तान में भारत के राजदूत रह चुके राकेश सूद का मानना है कि बांग्लादेश में शेख हसीना के रहते चीन उसे भारत से दूर करने में कामयाब नहीं हो पाएगा।