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ब्रिक्स सम्मेलन समाप्त, सदस्य देशों ने आतंक से मिल कर लड़ने का किया आह्वान

Mon, 17 Oct 2016 03:22 AM IST
एजेंसी/ बेनोलिम (गोवा)
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ब्रिक्स सम्मेलन - फोटो : Getty Images
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ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में सदस्य देशों ने आतंक के खिलाफ मिल कर लड़ने का आह्वान किया है। गोवा में आयोजित आठवें ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य देशों ने भारत और अपने यहां हुए आतंकी हमलों की निंदा की और सभी देशों से अपनी जमीन से होने वाली आतंकी कार्रवाइयों को रोकने की अपील की। सदस्य देशों ने यूएन में आतंक के खिलाफ भारत समर्थित समझौते को जल्द स्वीकार करने की अपील ताकि आतंकवाद से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।
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ब्रिक्स सम्मेलन में रविवार को जारी घोषणापत्र में सभी देशों से आतंकवाद, हिंसक अतिवाद, कट्टरपंथ और आतंकियों के आंदोलन और भर्ती पर व्यापक नजरिया अपनाने की अपील की गई है। इसमें कहा गया है कि सभी देश-विदेशी आतंकियों की गतिविधियों पर रोक लगाएं और आतंकवाद के वित्तीय स्त्रोतों को काट दें।
ब्रिक्स देशों ने जल्द से जल्द संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ समग्र समझौते को स्वीकार करने की अपील की। ब्रिक्स देशों की ओर से कहा गया कि वे भारत समेत कुछ अन्य सदस्य देशों में हुए हाल के आतंकी हमलों की निंदा करते हैं। सम्मेलन में आतंक के खिलाफ मिल कर लड़ने की इच्छा जताई गई।  इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का आह्वान किया और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का पनाहगाह करार दिया।
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ब्राजील, रूस, भारत,चीन और दक्षिण अफ्रीका ने अपने घोषणापत्र में मनी लांड्रिंग, नशीली दवाओं की तस्करी, आपराधिक गतिविधियों जैसे आतंकवाद का समर्थन करने वाले संगठित अपराधों को रोकने की अपील की है। साथ ही आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लागने, आतंकी ठिकानों को नष्ट करने और सोशल मीडिया के जरिये इंटरनेट का दुरुपयोग रोकने पर भी सहमति जताई गई है। ब्रिक्स देशों ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के प्रति एक बार फिर प्रतिबद्धता जाहिर की है ताकि मनी लांड्रिंग और आतंकियों को मिल रहे वित्तीय समर्थन को रोका जा सके। एफएटीएफ 1989 में गठित एक अंतर सरकारी संगठन है, जो मनी लांड्रिंग को रोकने के लिए जी-7 देशों की पहल पर बना था। 2001 में इसमें आतंकवाद के वित्तीय स्त्रोतों पर रोक लगाने की बात भी जोड़ दी गई थी।  ब्रिक्स देशों के घोषणापत्र में पेरिस जलवायु समझौते का भी समर्थन किया गया है। 
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मजबूत संसाधन वाले आईएमएफ की वकालत

भारत समेत सभी ब्रिक्स देशों ने एक मजबूत, कोटा आधारित और पर्याप्त संसाधन वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वकालत की है ताकि इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए वित्तीय संसाधन मुहैया हो सके। इससे विकासशील देशों के आर्थिक विकास को मदद मिलेगी। ब्रिक्स घोषणापत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर में निजी और सार्वजनिक निवेश के महत्व को रेखांकित किया गया है। इसमें कहा गया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश की कमी बहुस्तरीय विकास बैंक की ओर से पूरी की जा सकती है। 
एनडीबी इंफ्रा परियोजनाओं के लिए ढाई अरब देगा

ब्रिक्स सदस्यों द्वारा बनाए गए न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के अध्यक्ष केवी कामत ने कहा कि आधारभूत परियोजनाओं के लिए  पिछले साल के मुकाबले दोगुने से ज्यादा कर्ज दिया जाएगा। यानी एनडीबी 2017 में ढाई अरब डॉलर की आर्थिक सहायता आधारभूत परियोजनाओं को उपलब्ध कराएगा। कामत ने कहा कि ये आर्थिक मदद ज्यादातर ग्रीन इंफ्रा और संरक्षित विकास की परियोजनाओं के लिए होगी।  

घोषणापत्र में आईएस का नाम लेकिन जैश का नहीं 
ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद पर नकेल कसने के संदर्भ में आईएसआईएस का तो जिक्र है लेकिन पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नहीं।  इस पर आर्थिक रिश्तों के महासचिव अमर सिन्हा ने कहा कि इस मामले में सदस्य देशों में सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तानी आतंकी समूहों की कार्रवाइयों का शिकार रहा है ब्रिक्स के अन्य देश नहीं। 
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