देशभर में कोरोना के संक्रमित मामलों की दर प्रति 100 टेस्ट पर पांच फीसदी तक बढ़ गई है। ये आंकड़ा सात मई से 21 मई को आधार बनाकर निकाला गया है। हालांकि फरवरी से लेकर 21 मई तक प्रति 100 टेस्ट पर संक्रमित मामलों की दर चार फीसदी थी।
पंजाब, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने कोरोना को काबू करने के लिए बेहतर काम किया है। इन राज्यों ने महामारी को रोकने के लिए संक्रमित मामलों की दर को नीचे लेकर आने में सफलता हासिल की है।
देश में कम से कम ऐसे सात राज्य और केंद्र शासित राज्य हैं जहां कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और यहां सकारात्मक दर तुलनात्मक तौर पर ज्यादा है। इन राज्यों ने महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, चंड़ीगढ़, तमिलनाडु और बिहार शामिल हैं। इन राज्यों में सकारात्मक दर पांच से 18 फीसदी के बीच है और महाराष्ट्र में यह दर सबसे ज्यादा है।
मध्य प्रदेश में एक और जहां भोपाल और इंदौर में कोरोना के मामले बहुत ज्यादा है लेकिन फिर भी राज्य में कोरोना की सकारात्मक दर पांच फीसदी से गिरकर चार फीसदी हो गई है। ये आंकड़ा सात मई से 21 मई के बीच हुए टेस्ट और संक्रमित मामलों के आधार पर लिया गया है।
इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी सकारात्मक दर तीन फीसदी से दो फीसदी, पंजाब में चार फीसदी से दो फीसदी, आंध्र प्रदेश में 0.9 फीसदी से 0.6 फीसदी, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में यह दर एक फीसदी हो गई है। हालांकि कोरोना के टेस्ट को लेकर पश्चिम बंगाल से सवाल किए जाते हैं।
हिमाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, यहां कोरोना की सकारात्मक दर एक फीसदी से भी कम है। केरल राज्य ने कोरोना के हराने या उस पर काबू पाने में सबसे बेहतरीन काम किया है, केरल में सकारात्मक दर एक फीसदी ही है और यहां रिकवरी रेट 65 फीसदी है जबकि मध्य प्रदेश में 51 फीसदी है।
कोरोना की सकारात्मक दर एक ऐसा मापदंड है जिसका इस्तेमाल केंद्र सरकार की ओर से यह देखने के लिए किया जाता है कि कौन सा राज्य कोविड-19 पर काबू पाने के लिए कितना बेहतर काम कर रहा है।
सकारात्मक दर के आधार पर ही राज्य में आर्थिक गतिविधियों को खोलने पर लॉकडाउन में लगाए गए प्रतिबंधों में छूट देने जैसा फैसला लिया जाता है। किसी राज्य में ज्यादा मृत्युदर और संक्रमित मामले बताते हैं कि राज्य में केवल बीमार लोगों का ही टेस्ट किया जा रहा है कोविड-19 लक्षण वाले मरीजों की पर्याप्त स्क्रीनिंग नहीं की जा रही है।