मंडाविया ने कहा कि ई-केयर के जरिए केंद्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रभाग, नोडल अधिकारी, एपीएचओ, कंसाइनी और एयरलाइंस को सारी सूचनाएं भेजी जाएंगी। इस तरह से इस प्रक्रिया में जुड़े सभी लोगों को एक पोर्टल के जरिए से एकीकृत किया जाएगा।
विदेशों में रहने वाले भारतीयों के परिजनों के लिए भारत सरकार ने एक पहल की है। इस पहल को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी दी है। इसके जरिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया है कि मंत्रालय कल यानी तीन अगस्त को ई-केयर (e-clearance for after life remains) पोर्टल लॉन्च करेगा। इस पोर्टल के जरिए विदेश में मरने वाले भारतीय नागरिकों के शवों को भारत लाने के लिए सुविधा प्रदान करेगी।
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उन्होंने यह भी बताया है कि हवाईअड्डा स्वास्थ्य संगठन (एपीएचओ) के नोडल अधिकारी हर वक्त इस पोर्टल की निगरानी करेंगे। वे इस पर आए आवेदनों की जांच करेंगे और उन्हें अपनी मंजूरी देंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस पोर्टल में एक अलर्ट आधारित प्रणाली भी होगी, इसके जरिए अधिकारियों को आवेदनों को ट्रैक करने में भी मदद मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया है कि इस पोर्टल में दो तरह के प्रावधान किए गए हैं। इनमें से एक मृत शव लाने के लिए है और दूसरा राख लाने के लिए। मंडाविया ने कहा कि ई-केयर के जरिए केंद्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रभाग, नोडल अधिकारी, एपीएचओ, कंसाइनी और एयरलाइंस को सारी सूचनाएं भेजी जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह से इस प्रक्रिया में जुड़े सभी लोगों को एक पोर्टल के जरिए से एकीकृत किया जाएगा। वे सभी एक ही कार्यवाही से अवगत होंगे। साथ ही इस पोर्टल पर पंजीकरण संख्या डालकर आवेदन के स्टेटस को भी देखा जा सकता है।
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मंडाविया ने कहा है कि इसके लिए आवेदक को चार दस्तावेजों मृत्यु प्रमाण पत्र, शव को सुरक्षित रखने के लिए लगाए जाने वाले रसायन का लेप प्रमाण पत्र, भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और मृतक के रद्द किए गए पासपोर्ट की स्कैन की गई प्रतियां जमा करनी होंगी।
बता दें कि वर्तमान में विदेशों में मरने वाले भारतीयों के शव लाने के लिए एयरलाइंस के माध्यम से एपीएचओ द्वारा ईमेल-आधारित मंजूरी ली जाती है। ऐसे में दस्तावेजों के स्पष्टीकरण में कई बार देरी होती है। ईमेल को दोनों हितधारकों द्वारा व्यक्तिपरक समय अवधि में जांचा जाता है और प्रतिक्रिया में अंतरराष्ट्रीय समय क्षेत्र के कारण भी देरी होती है।