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मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा बोले: जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के लिए जनसंख्या एकमात्र पैमाना नहीं, पूरी जनसंख्या को प्रतिनिधित्व देने पर फोकस

Fri, 13 May 2022 06:42 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जम्मू कश्मीर संबंधी परिसीमन आयोग का गठन मार्च 2020 में हुआ था और उसने पांच मई को अपनी अंतिम रिपोर्ट को अधिसूचित किया। इसमें जम्मू क्षेत्र को छह अतिरिक्त विधानसभा सीट और कश्मीर घाटी को एक अतिरिक्त सीट दी गई है। 90 सदस्यीय विधानसभा में अब जम्मू क्षेत्र से 43 और कश्मीर से 47 सीट होंगी।
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सुशील चंद्रा, मुख्य चुनाव आयुक्त - फोटो : ANI
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विस्तार
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मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुशील चंद्रा ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में परिसीमन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होने कहा कि परिसीमन करते वक्त जनसंख्या का विषय अहम था, लेकिन वह एकमात्र मानदंड नहीं था। केंद्रशासित प्रदेश को एक इकाई के तौर पर देखा जाना चाहिए। हमारी मंशा पूरी जनसंख्या को 90 विधानसभा सीटों में प्रतिनिधित्व देने की होनी चाहिए। दरअसल, चंद्रा जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों से संबंधित परिसीमन आयोग के पदेन सदस्य थे। आयोग ने पिछले दिनों अपना अंतिम आदेश सौंप दिया था। 

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उन्होंने कहा कि पहले के परिसीमन के साथ कई सारी समस्याएं थीं और उन्हें अब ठीक कर लिया गया है। चंद्रा कुछ तबकों की इस आलोचना के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे कि जनसंख्या अनुपात को देखते हुए कश्मीर क्षेत्र को जम्मू की तुलना में कम सीट मिली हैं।

चंद्रा ने कहा कि जनसंख्या परिसीमन के मानदंडों में से सिर्फ एक मानदंड है। परिसीमन कानून तथा जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून के प्रावधानों के अनुसार जनसंख्या के अलावा चार अन्य मानदंड हैं। इनमें कहा गया है कि भौतिक स्थितियों, संचार सुविधाओं, सार्वजनिक सुविधाओं तथा उस क्षेत्र की प्रशासनिक इकाइयों पर भी विचार करना होगा। इसलिए यह चार अन्य मानदंड हैं, जिन पर गौर किया जाना है।  जनसंख्या महत्वपूर्ण मानदंडों में से एक है, लेकिन एकमात्र मानदंड नहीं है। इसे लोगों के ध्यान में रखना चाहिए।"
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चंद्रा शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त पद से अवकाश ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को एक इकाई के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे अलग-अलग हिस्सों में देखा नहीं जा सकता है। यह एक एकल केंद्रशासित प्रदेश है। पूरी आबादी को 90 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व देना होगा। कश्मीर घाटी को कम प्रतिनिधित्व दिया गया है या जम्मू डिवीजन को कम दिया गया है। ऐसा नहीं है। यह 20 जिलों और 207 तहसीलों को मिलाकर एक पूरी इकाई है। हमें इसे एक पूरी इकाई के तौर पर देखना होगा।

जम्मू कश्मीर संबंधी परिसीमन आयोग का गठन मार्च 2020 में हुआ था और उसने पांच मई को अपनी अंतिम रिपोर्ट को अधिसूचित किया। इसमें जम्मू क्षेत्र को छह अतिरिक्त विधानसभा सीट और कश्मीर घाटी को एक अतिरिक्त सीट दी गई है। 90 सदस्यीय विधानसभा में अब जम्मू क्षेत्र से 43 और कश्मीर से 47 सीट होंगी।

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