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चिंता: चीनी के लोकप्रिय विकल्प एरिथ्रिटोल से स्ट्रोक का खतरा; नई रिसर्च ने दिमागी नसों के लिए बताया खतरनाक

Fri, 02 Jan 2026 05:32 AM IST
पवन पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

एरिथ्रिटोल एक प्रकार का शुगर अल्कोहल है, जिसे आमतौर पर मक्के को फर्मेंट करके बनाया जाता है। इसे वर्ष 2001 में अमेरिकी खाद्य-औषधि प्रशासन (एफडीए) से मंजूरी मिली थी, जिसमें लगभग न के बराबर कैलोरी होती है। यह साधारण चीनी से 80% मीठा होता है और इंसुलिन पर इसका असर बहुत कम पड़ता है।
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चीनी के लोकप्रिय विकल्प एरिथ्रिटोल से स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Freepik
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विस्तार
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अमेरिकी वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने शुगर-फ्री लिखे उत्पादों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शोध के मुताबिक, चीनी के लोकप्रिय विकल्प ‘एरिथ्रिटोल’ का सेवन दिमाग की नसों की कार्यप्रणाली को क्षति पहुंचाते हुए स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। शुगर-फ्री उत्पाद डाइट ड्रिंक से लेकर आइसक्रीम तक व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं। इस स्वीटनर को लेकर अब सावधानी की जरूरत बताई जा रही है।
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क्या होता है एरिथ्रिटोल?
एरिथ्रिटोल एक प्रकार का शुगर अल्कोहल है, जिसे आमतौर पर मक्के को फर्मेंट करके बनाया जाता है। यह साधारण चीनी से 80% कम मीठा होता है और इंसुलिन पर इसका असर बहुत कम पड़ता है। यही वजह है कि वजन घटाने, ब्लड शुगर नियंत्रित रखने और कम-कार्ब डाइट अपनाने वाले लोग इसे लंबे समय से सुरक्षित विकल्प मानते आए हैं। इसे वर्ष 2001 में अमेरिकी खाद्य-औषधि प्रशासन (एफडीए) से मंजूरी मिली थी, जिसमें लगभग न के बराबर कैलोरी होती है।
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थक्का टूटने की क्षमता भी कमजोर
शोध के दौरान जब इन कोशिकाओं को थ्रोम्बिन नामक रसायन के संपर्क में लाया गया, तो शरीर के प्राकृतिक क्लॉट तोड़ने वाले तत्व टी-पीए का उत्पादन काफी कम पाया गया। इसका मतलब यह है कि खून का थक्का बनने पर उसे तोड़ने की शरीर की क्षमता कमजोर हो सकती है। इसके साथ ही, एरिथ्रिटोल के कारण कोशिकाओं में फ्री रेडिकल्स यानी रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज की मात्रा बढ़ी, जो कोशिकाओं को तेजी से बूढ़ा करती हैं, सूजन बढ़ाती हैं और दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाती हैं।

शुगर-फ्री का मतलब जोखिम-मुक्त नहीं
यह रिसर्च एक बड़े सामाजिक संदेश की ओर भी इशारा करता है। बदलती जीवनशैली बीमारियों के दौर में लोग तेजी से ‘शुगर-फ्री’ विकल्पों की ओर जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य बताते हैं कि बिना कैलोरी वाली मिठास भी शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकती। विशेषज्ञों के मुताबिक संतुलित आहार, प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सीमित और समझदारी भरा सेवन, और किसी भी प्रकार की कृत्रिम मिठास से पहले चिकित्सकीय सलाह ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
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दिमागी क्षमता पर भी पड़ सकता है असर
जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक कम या बिना कैलोरी वाले शुगर सब्स्टीट्यूट का अधिक सेवन दिमागी सोच और याददाश्त पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इस शोध में पाया गया कि जो लोग कृत्रिम मिठास का सबसे ज्यादा सेवन करते हैं, उनमें सोचने और याद रखने की क्षमता उन लोगों की तुलना में तेजी से घटती है जो इसका सीमित सेवन करते हैं।

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