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गरीब किसानों के पास है देश को मंदी से बचाने का नुस्खा, क्या अपनाएगी सरकार

Sun, 24 May 2020 09:37 PM IST
Rohit Ojha अमित शर्मा, नई दिल्ली

सार

  • विशेषज्ञों का अनुमान, देश की 50 फीसदी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर, मदद से बन सकते हैं अर्थव्यवस्था की ताकत
  •  देश की जीडीपी में लगभग 30 लाख करोड़ रुपये (या लगभग 15 फीसदी) का योगदान करते हैं किसान
  • 27 मई को मनाया जाएगा 'किसान बचाओ, देश बचाओ दिवस', सरकार से कृषि क्षेत्र के लिए होगी विशेष पैकेज की मांग
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खेत में काम करता एक किसान। - फोटो : PTI
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विस्तार
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देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ के विशेष आर्थिक राहत पैकेज का एलान किया है। इसका असर आने वाले समय में दिखाई पड़ेगा। लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में मांग पैदा किए बिना यह पैकेज भी अर्थव्यवस्था को गति देने में असफल साबित हो सकता है।

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बाजार में मांग पैदा करने के लिए लोगों के हाथ में पैसा पहुंचाना आवश्यक है जिससे लोग खरीदारी के लिए आगे आएं। इसके लिए कृषि क्षेत्र को आधार बनाया जाना चाहिए। कृषि क्षेत्र पर आज भी देश की लगभग 50 फीसदी आबादी निर्भर करती है। इस तरह इस क्षेत्र को मजबूत करने से न सिर्फ मांग बढ़ेगी, बल्कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में भी मजबूती आएगी।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक सरदार वीएम सिंह ने 'अमर उजाला' से कहा कि केंद्र ने बीस लाख करोड़ रुपये के पैकेज में सबसे ज्यादा जोर उन उद्योगों को चलाने पर दिया है जो लॉक डाउन में खड़े नहीं रह पाए, जबकि उसे सबसे ज्यादा जोर देश के किसानों पर देना चाहिए था, जो लॉक डाउन की परेशानियों के बाद भी मजबूती के साथ खड़ा रहा। इस वर्ग की ताकत बढ़ाने से मांग बढ़ेगी जिससे उद्योगों को भी ताकत मिलेगी। अगर इस वर्ग की खरीदी की ताकत में बढ़ोतरी नहीं की गई तो बाजार में मांग पैदा करना बेहद मुश्किल है।

लॉक डाउन में कृषि को हुआ भारी नुकसान

कृषि आर्थिक विशेषज्ञ देवेंदर शर्मा के मुताबिक लॉक डाउन के कारण कृषि क्षेत्र को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। इसमें सब्जियों, फलों-फूलों और डेयरी उत्पादों को न बेचे जाने के कारण हुआ नुकसान शामिल है।

इसकी भरपाई के लिए सरकार को किसानों के खाते में सीधी आर्थिक मदद पहुंचानी चाहिए। अगर सरकार किसानों को राहत पैकेज देकर उनको मजबूती देती है तो इससे कृषि क्षेत्र भी मजबूत होगा और शहरों को पलायन कर गांव पहुंचे लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। इससे देश की जीडीपी को भी मजबूत करने में सफलता मिलेगी।

24 हजार रुपये सालाना की मिले मदद

किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं कि केंद्र सरकार किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को प्रति वर्ष छः हजार रुपये की मदद करती है। आज के दौर में यह नाकाफी है। इसे बढ़ाकर 24 हजार रुपये प्रति वर्ष किया जाना चाहिए।

देश में 14 करोड़ किसान परिवार हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक केवल 9.5 करोड़ किसानों को छः हजार रुपये प्रति वर्ष की मदद मिल पाती है। लेकिन अगर 14 करोड़ परिवारों को 24 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलती है तो इससे किसान कृषि उपकरणों, बीज, खाद के साथ-साथ अन्य चीजों की खरीद करेंगे।

इससे बाजार में मांग बढ़ेगी। यह लागत बढ़ाने से सरकार पर कुल 2.30 लाख करोड़ रुपये (मौजूदा किसान सम्मान निधि के 75 हजार करोड़ रुपये सहित) का बोझ पड़ेगा। इस पैसे का भी बड़ा भाग बाजार में पैदा हुए मांग से टैक्स की भरपाई के रुप में वापस आ जाएगा। इस प्रकार सरकार पर अंतिम बोझ काफी कम पड़ेगा।

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केंद्र की इन योजनाओं से मदद की उम्मीद

कृषि क्षेत्र इस समय लगभग तीस लाख करोड़ रूपये या जीडीपी का लगभग 15 फीसदी उत्पादन करता है। इसमें दूध और पशुपालन से पैदा हुआ 10 लाख करोड़ रुपये का उत्पाद भी शामिल है। अगर सरकार किसानों को मजबूती देती है तो इससे इस उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी और इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में भी वृद्दि होगी।

केंद्र की इन योजनाओं से मदद की उम्मीद

केंद्र सरकार ने विशेष पैकेज में किसानों के लिए भी कई योजनाओं की घोषणा की है। माना जा रहा है कि मनरेगा के लिए की गई 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन भी अप्रत्यक्ष रुप से किसानों की आय बढ़ाने वाला साबित होगा। लेकिन देश में अनुमानतः आठ करोड़ श्रमिक विभिन्न सेक्टरों में मजदूरी का काम करते हैं। केंद्र ने अन्य योजनाओं के जरिए पैकेज में श्रमिकों के लिए 3500 करोड़ रुपये का एलान किया है। इतने विशाल वर्ग के लिए यह राहत पैकेज बहुत कम माना जा रहा है।

महाराष्ट्र की किसान नेता प्रतिभा शिंदे की सलाह है कि मनरेगा को भी कृषि से सीधे जोड़ दिया जाना चाहिए। इससे किसान अपने ही खेतों में काम करेगा और इसके लिए उसे मनरेगा के तहत पैसे भी मिलेंगे। इस पैसे को कृषि क्षेत्र को अप्रत्यक्ष सब्सिडी के तौर पर भी देखा जा सकता है। इससे किसानों की उत्पादन लागत घटेगी और उसको ज्यादा मुनाफा होगा।

इससे भी देश की सबसे वंचित आबादी को मजबूती मिलेगी जिससे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। अनुमानतः गन्ना किसानों का लगभग 20 हजार करोड़ रुपये अभी भी चीनी मिलों पर बकाया है। अगर इस बिल का भुगतान भी करा दिया जाता है तो इससे देश के 40 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

27 मई को किसान करेंगे विरोध

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक सरदार वीएम सिंह ने बताया कि 27 मई को वे किसानों के मुद्दे को उठाने के लिए पूरे देश में किसान बचाओ, देश बचाओ दिवस मनाएंगे। इसके तहत देश के हर हिस्से से प्रधानमंत्री को विशेष पत्र लिख किसानों की समस्याओं से अवगत कराया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक किसान कर्जमाफी, सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत मूल्य के न्यूनतम 50 फीसदी लाभ के साथ घोषित करने और डीजल के मूल्यों में कटौती की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा बिजली के दामों में कटौती, किसान सम्मान निधि बढ़ाने की मांग की जा सकती है।

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