कृषि क्षेत्र इस समय लगभग तीस लाख करोड़ रूपये या जीडीपी का लगभग 15 फीसदी उत्पादन करता है। इसमें दूध और पशुपालन से पैदा हुआ 10 लाख करोड़ रुपये का उत्पाद भी शामिल है। अगर सरकार किसानों को मजबूती देती है तो इससे इस उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी और इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में भी वृद्दि होगी।
केंद्र की इन योजनाओं से मदद की उम्मीद
केंद्र सरकार ने विशेष पैकेज में किसानों के लिए भी कई योजनाओं की घोषणा की है। माना जा रहा है कि मनरेगा के लिए की गई 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन भी अप्रत्यक्ष रुप से किसानों की आय बढ़ाने वाला साबित होगा। लेकिन देश में अनुमानतः आठ करोड़ श्रमिक विभिन्न सेक्टरों में मजदूरी का काम करते हैं। केंद्र ने अन्य योजनाओं के जरिए पैकेज में श्रमिकों के लिए 3500 करोड़ रुपये का एलान किया है। इतने विशाल वर्ग के लिए यह राहत पैकेज बहुत कम माना जा रहा है।
महाराष्ट्र की किसान नेता प्रतिभा शिंदे की सलाह है कि मनरेगा को भी कृषि से सीधे जोड़ दिया जाना चाहिए। इससे किसान अपने ही खेतों में काम करेगा और इसके लिए उसे मनरेगा के तहत पैसे भी मिलेंगे। इस पैसे को कृषि क्षेत्र को अप्रत्यक्ष सब्सिडी के तौर पर भी देखा जा सकता है। इससे किसानों की उत्पादन लागत घटेगी और उसको ज्यादा मुनाफा होगा।
इससे भी देश की सबसे वंचित आबादी को मजबूती मिलेगी जिससे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। अनुमानतः गन्ना किसानों का लगभग 20 हजार करोड़ रुपये अभी भी चीनी मिलों पर बकाया है। अगर इस बिल का भुगतान भी करा दिया जाता है तो इससे देश के 40 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
27 मई को किसान करेंगे विरोध
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक सरदार वीएम सिंह ने बताया कि 27 मई को वे किसानों के मुद्दे को उठाने के लिए पूरे देश में किसान बचाओ, देश बचाओ दिवस मनाएंगे। इसके तहत देश के हर हिस्से से प्रधानमंत्री को विशेष पत्र लिख किसानों की समस्याओं से अवगत कराया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक किसान कर्जमाफी, सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत मूल्य के न्यूनतम 50 फीसदी लाभ के साथ घोषित करने और डीजल के मूल्यों में कटौती की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा बिजली के दामों में कटौती, किसान सम्मान निधि बढ़ाने की मांग की जा सकती है।