सियासी जानकारों का मानना है कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की तरह ही तेलंगाना और मिजोरम में भी आदिवासी और दलितों के हाथों में सत्ता की चाबी रहती है। तेलंगाना की 30 फीसदी आबादी दलित और आदिवासी समुदाय से सीधे तौर पर ताल्लुक रखती है। यहां की 119 विधानसभा सीटों में 31 सीटें इन्हीं समुदाय के लिए रिजर्व रखी जाती हैं। इसमें 19 सीटें दलित समुदाय और 12 सीटें आदिवासियों के लिए सुरक्षित हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2018 में केसीआर ने ही इस समुदाय की सीटों पर कब्जा करके सत्ता को बरकरार रखा था। मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों में आदिवासी समुदाय के हिस्से में आती हैं। जबकि एक सीट सामान्य श्रेणी में आती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2018 में एमएनएफ इसी समुदाय की सीटों पर सबसे ज्यादा कब्जा कर सत्ता में पहुंचे थे।