सत्यपाल मलिक ने पत्र में लिखा कि पीएम के इस कदम से सिख समुदाय में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ी। सिखों के गुरुओं के प्रति प्रधानमंत्री ने जो श्रद्धा भाव एवं सम्मान व्यक्त किया है, उसके लिए पूरी दुनिया के और विशेषकर भारत के सिखों को एक सकारात्मक संदेश मिला है। प्रधानमंत्री मोदी ने सिख गुरुओं की परंपराओं की सराहना करते हुए कहा था कि सैकड़ों साल की गुलामी से भारत की आजादी को उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा से अलग नहीं किया जा सकता है। सिख समुदाय के लिए अपनी सरकार के प्रयासों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों के बलिदान की याद में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया। संशोधित नागरिकता कानून ने पड़ोसी देशों से भारत आए सिख परिवारों और अन्य अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त किया है।
बता दें कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक, मेघालय से पहले 2020 में गोवा के राज्यपाल थे। सत्यपाल मलिक का एक साल में तीसरा तबादला हुआ था। तीन साल में उन्होंने चार राज्यों में राज्यपाल का पद संभाला था। सत्यपाल मलिक को 30 सितंबर, 2017 को पहली बार बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। एक साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें 23 अगस्त 2018 को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बना दिया गया। उसी दौरान मलिक को कुछ महीनों के लिए ओडिशा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। खास बात ये है कि जम्मू कश्मीर में जब अनुच्छेद 370 हटाया गया तो सत्यपाल मलिक ही वहां के राज्यपाल थे।
किसान आंदोलन के दौरान मलिक ने कई बार केंद्र को सलाह दी थी कि सरकार को सिखों से झगड़ा नहीं करना चाहिए। उनकी मांग पर गंभीरता से गौर किया जाए। हालांकि, इस बीच मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हरियाणा के जींद में आयोजित एक सम्मान समारोह में किसानों से कहा था कि वे लड़ने से पहले सवालों को समझें। वे सबसे पहले राज बदलें, फिर एकजुट होकर अपनी सरकार बनाएं। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कथित तौर पर किसान आंदोलनकारियों के उस कदम को सही बताया था, जिसमें लाल किले पर 'निशान साहिब' फहराया गया था।
उनका कहना था कि इसमें कुछ भी गलत नहीं था। उन्होंने कहा था कि राज्यपाल के पद पर उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे खुद देशभर का दौरा कर, किसानों को एकजुट करेंगे। केंद्र ने किसानों से आधा-अधूरा समझौता कर उन्हें धरने से उठा दिया। मलिक ने कहा था कि उनके कुछ मित्रों ने सलाह दी थी कि वह उपराष्ट्रपति या राष्ट्रपति बन सकते हैं, इसलिए उन्हें चुप रहना चाहिए। बतौर मलिक, मैंने उन्हें कह दिया था कि मैं इन पदों की परवाह नहीं करता। उनके लिए राज्यपाल का पद महत्वपूर्ण नहीं है।
किसान आंदोलन में उन्होंने कहा, केवल 10 किलोमीटर दूर पीएम हाउस था। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी, किसानों से संवेदना जताने नहीं आए। मलिक ने कहा कि उन्होंने कभी उसूलों से समझौता नहीं किया। अपने पद की परवाह किए बिना उन्होंने किसानों की आवाज उठाई है। अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद उनका कहना था कि जब यह निर्णय लिया गया तो राजनीतिक बवाल मच गया था। राजनीतिक दल पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने खून की नदियां बहने की बात कही थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला ने कहा था कि अब देश का झंडा कोई नहीं उठाएगा। उस वक्त जिन नेताओं को जेल में डाला गया, प्रधानमंत्री ने उन नेताओं को रिहा करा कर उन्हें चाय पिलाई। इसके बाद भी मलिक के कई ऐसे बयान आए, जिसके बाद केंद्र सरकार और भाजपा, असहज स्थिति में आ गए थे।
अपनी बयानबाजी के बल पर सत्यपाल मलिक की, खासतौर पर उत्तर भारत के जाट समुदाय में 'दबंग' नेता की छवि बन गई है। भाजपा को उनके जनाधार का पता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा, मलिक को अपने साथ ला सकती है। वजह, यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान, पश्चिमी क्षेत्र में भाजपा को कई सीटें खोनी पड़ी हैं। जयंत चौधरी की पार्टी रालोद के पास पहले एक सीट थी, अब आठ हो गई हैं। इस चुनाव में भाजपा को जाट नेता की कमी महसूस हुई थी। हो सकता है कि भाजपा, 2024 में मलिक की सेवाएं ले। मलिक भी दोबारा से सक्रिय राजनीति में लौटने का संकेत दे चुके हैं। कुछ माह बाद उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है।
एक बार मलिक ने कहा था, मैं दिल्ली में डेढ़ कमरे के मकान में रहता हूं, इसलिए मैं किसानों के मुद्दे पर मोदी से पंगा ले सकता हूं। वैसे मेरी केन्द्र से कोई दुश्मनी नहीं है। हां, मैं किसानों के लिए अपना पद छोड़ सकता हूं। मलिक ने यह भी कहा था कि किसानों के मुद्दे पर जब वह प्रधानमंत्री से मिले थे तो महज पांच मिनट में ही उनकी लड़ाई हो गई थी। मलिक ने कहा था कि जब वे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे तो उन्हें करोड़ों रुपये की रिश्वत देने की पेशकश की गई थी। अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। वीरवार को जांच एजेंसी ने इस केस में छह राज्यों में 14 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी इस मामले में मेघालय के राज्यपाल मलिक से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।