धर्मसभा के राजनीतिकरण पर जब विश्व हिंदू परिषद से प्रतिक्रिया ली गई तब उसके नेता डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि उनके मंदिर आंदोलन को भाजपा, नरेंद्र मोदी या अगले लोकसभा चुनाव से जोड़ना बिलकुल गलत है। क्योंकि उनकी सभा के मंच पर एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं था जिसे राजनेता कहा जा सकता हो।
दूसरी बात, राममंदिर का आंदोलन उस समय शुरू हो गया था जब आरएसएस, विहिप या भाजपा का कोई अस्तित्व ही नहीं था। आखिर उस समय किस राजनीतिक दल के लाभ के लिए आंदोलन किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि संतों की इस सभा को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। हमारी मांग मंदिर बनाने की है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए कांग्रेस आगे आए, हम उनका भी समर्थन करने के लिए तैयार हैं।
आल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक सरदार वीएम सिंह ने भी किसान आंदोलन के राजनीतिकरण से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनकी मांग संसद में किसानों के मुद्दे पर कानून बनाने के लिए है। जाहिर है कि यह काम राजनीतिक दल, राजनेता और सांसद ही करेंगे। ऐसे में उनके मंच पर उन दलों का आना स्वाभाविक था।