केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने कहा कि निवेशकों के हितों की कीमत पर कंपनियों को स्वायत्तता नहीं दी जा सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मुखौटा कंपनियों की जांच में राजनीतिक पार्टियों और कुछ व्यक्तियों के सच सामने आ सकते हैं। कंपनी मामलों के राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार कंपनियों के संचालन में पारदर्शिता चाहती है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि धन की हेराफेरी तथा अवैध गतिविधियों के लिए उनका दुरुपयोग न हो।
कंपनी मामलों के मंत्रालय ने लंबे समय से कारोबार नहीं कर रही करीब 2.25 लाख कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इससे पहले भी लंबे समय से कारोबार नहीं करने और सांविधिक सूचनाएं दाखिल नहीं करने वाली करीब 2.26 लाख कंपनियों के नाम मंत्रालय ने अपनी सूची से हटा दिए हैं।
चौधरी ने कहा कि इन कंपनियों की जांच में यह समझने की कोशिश की जा रही है कि उनके वित्तीय तार कहां-कहां से जुड़े हुए थे।