लंदन में भारतीय मूल के एक अमेरिकी एक्सपर्ट ने ईवीएम हैकिंग का दावा कर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। एक्सपर्ट सैयद सहूजा के मुताबिक दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने साल 2014 में ईवीएम की हैकिंग के लिए उनसे संपर्क किया था। सैयद के मुताबिक यही राज बाद में मुंडे की मौत का कारण भी बना।
इस खुलासे के बाद देश के तमाम राजनीतिक दलों ने एक बार फिर ईवीएम पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। विपक्ष की मांग है कि अगला लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाए। वहीं, चुनाव आयोग ने ईवीएम हैकिंग को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि वह इस तरह की अफवाह उड़ाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरी दुनिया ईवीएम से दूर जा रही है। तमाम बड़े देश फिर से बैलेट सिस्टम पर आ रहे हैं। केवल भारत, कांगो और अफ्रीका के कुछ देश ईवीएम से चुनाव करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि अब एक दो माह में बैलेट से चुनाव कराना संभव नहीं है, लेकिन वोटिंग प्रक्रिया को सुरक्षात्मक और भरोसेमंद बनाने के लिए वीवीपैट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
आरजेडी के प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान में साफ और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें ईवीएम की रक्षा करने के लिए नही कहा गया है। ईवीएम केवल एक माध्यम है। इस तरह के खुलासों के बाद ईवीएम की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गई है। ऐसे में चुनाव आयोग को एक बार फिर बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने पर विचार करना चाहिए।
वहीं आप नेता अरविंद झा ने कहा कि ईवीएम की मूल डिजाइन में किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है। लेकिन इसका रखरखाव करने से लेकर अन्य किसी स्तर पर चिप लगाने के बाद इसमें छेड़छाड़ की जा सकती है। वहीं प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ईवीएम से चुनाव कराने में कोई समस्या नहीं है लेकिन इसे वीवीपैट से जोड़ना अनिवार्य होना चाहिए।
भाजपा ने किया इनकार
वहीं, भाजपा ने ईवीएम की हैकिंग की बात को पूरी तरह से मनगढ़ंत करार देते हुए खारिज किया है। बीजेपी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि लंदन में जो भी दावे किये गए हैं, वे बेसिर पैर के हैं और बात को साबित करने के लिए एक भी सबूत नहीं रखे गए हैं। इसी से साबित हो जाता है कि यह चुनाव के समय सनसनी फैलाने की गलत कोशिश है।
मालवीय ने कहा कि ईवीएम पर जब शंकाएं खड़ी की गई थीं, तब चुनाव आयोग ने हैकेथान प्रतियोगिता का आयोजन किया था। लेकिन विपक्ष का एक भी नेता उस समय ईवीएम को हैक करने के लिए नहीं पहुंचा। इसी से साबित होता है कि विपक्ष के पास सनसनी फैलाने के अलावा कहने के लिए कुछ नहीं है।