उड़ी हमले के बाद 28-29 सितंबर की रात को सेना द्वारा हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर बयानों का दौर जारी है। डीजीएमओ की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूरे देश में इस कदम को सराहा जा रहा है। लेकिन, कुछ नेता सर्जिकल स्ट्राइक पर ही संदेह कर रहे हैं तो कुछ नेताओं का कहना है कि ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक पहले भी होती रही है।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कहीं मिठाई बांटी तो कहीं पटाखे फोड़े। कई स्थानों पर होर्डिंग-पोस्टर लगाकर नरेंद्र मोदी को बधाई दी। कई लोगों का कहना था कि सर्जिकल स्ट्राइक से देश का मान बढ़ा है और इसके बाद दुश्मन देश कोई भी आतंकी घटना को अंजाम देने से पहले कई बार सोचेगा।
आगे पढ़िए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आए कुछ नेताओं के बयान...
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारे जिन जवानों ने जम्मू कश्मीर में अपनी जान दी, सर्जिकल स्ट्राइक किया है आप उनके खून की दलाली कर रहे हो। ये बिल्कुल गलत है। हालांकि, इस बयान की निंदा शुरू हुई तो उन्होंने ट्वीट किया, 'मैं सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के सपोर्ट में हूं। इसकी निंदा नहीं करता हूं, लेकिन राजनीतिक पोस्टरों में सेना का इस्तेमाल गलत है।'
अरविंद केजरीवाल ने भी वीडियो जारी कर सर्जिकल स्ट्राइक्स के लिए पीएम मोदी को सैल्यूट किया था, लेकिन साथ ही कहा था कि जिस तरह से पाकिस्तान इन स्ट्राइक्स को झुठलाने की कोशिश कर रहा है, उस झूठ को साबित करने के लिए सबूत दिए जाने चाहिए। वहीं, राहुल गांधी का बयान आने के बाद उन्होंने गुरुवार को कहा कि सेना की शहादत को खून की दलाली बोला है, ये ठीक नहीं है, हम इसकी आलोचना करते हैं।
अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल ने सबसे पहले स्ट्राइक के सबूत मांगे थे, जिसके बाद पाकिस्तान में #PakStandsWithKejriwal और #KejriwalSupportPakistan ट्रेन्ड में आया। आप समझ सकते हैं कि उनके बयान का क्या असर पड़ा है। वहीं, राहुल किस चीज की दलाली की बात कर रहे हैं? कोयला और बोफोर्स में किसने दलाली की? दलाली शब्द कांग्रेस के दिमाग में पहले से है। मैं राहुल से पूछना चाहता हूं कि शहादत की कैसे दलाली होती है? उनके बयान से सेना का मनोबल कम हुआ है।