हरसिमरत कौर बादल की दुविधा
शिरोमणि अकाली दल (बादल) की सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की दुविधा काफी बढ़ गई है। बादल तेज तर्रार नेता हैं। उनकी संवाद शैली भी बहुत अच्छी है, लेकिन पूरी योग्यता धरी की धरी रह जा रही है। केन्द्र सरकार में मंत्री रहने के कारण किसान संगठन जहां खास ध्यान नहीं दे रहे हैं, वहीं आज उनका गाजीपुर का दौरा भी सफल नहीं हो पाया। हरसिमरत कौर संसद भवन परिसर में पहले आती थीं तो मीडियाकर्मी उन्हें बाइट लेने के लिए घेर लेते थे। लेकिन जब से उन्होंने केन्द्र सरकार का साथ छोड़ा है, इसमें भी काफी कमी आई है। दो दिन पहले किसानों के मुद्दे पर हरसिमरत कौर किसानों के मुद्दे पर किसानों पर बरस रही थीं तो पीछे से एक भाजपा सांसद तंज कसते हुए निकल गए कि क्या दिन आ गए। जब चाहे सत्ता में रहो सरकार का गुणगान करो और जब चाहे बाहर होकर मोदी सरकार को पानी पीकर कोसो।
किसानों के आंदोलन में राजनीति की घुसपैठ कराएगी फायदा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लग रहा है कि किसान आंदोलन में जल्द ही पासा पलटेगा। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर अभी वेट एंड वाच की भूमिका में हैं। विदेश मंत्रालय इसे लेकर विदेश और मीडिया में बढ़ रही हलचल को लेकर तंग है। इससे इतर एक मोदी सेना है। सोशल मीडिया से लेकर हर जगह काफी सक्रिय है। इन सबके साथ-साथ केन्द्र सरकार के आधिकारियों और सलाहकारों का भी वर्ग है। इसे उम्मीद है कि जल्द ही किसानों के आंदोलन में बढ़ रहा राजनीतिक दबाव सरकार को बड़ी राहत दे सकता है। बताते हैं कि भाकियू के नेता टिकैत अब आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए हैं। कृषि मंत्रालय के एक नौकरशाह का कहना है कि आंदोलन पर जब सरकार का दबाव होता है, तो उसे राजनीतिक संरक्षण की जरूरत पड़ती है, लेकिन आंदोलन पर राजनीति हावी हो जाती है, तब उसके भटकने का खतरा बढ़ जाता है। सूत्र के मुताबिक सरकार को हमेशा ऐसे ही समय की तलाश रहती है।