मोदी सरकार-1 के सबसे चमकते सितारे भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ही थे। हों भी क्यों न, पूरे देश में सड़क, एक्सप्रेस-वे का जाल जो बिछा दिया था। इतना ही नहीं बेबाक बयानों के लिए भी चर्चा में रहे, लेकिन अब गडकरी यदाकदा ही चर्चा में आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्रियों के बीच में गडकरी की चर्चा करने पर उनका नाम सब बस आदर से लेकर चुप हो जाते हैं। राजस्थान से आने वाले एक मंत्री के सामने भी जब यह चर्चा आई, तो जनाब बोल पड़े ''जंगल में कितने शेर होने चाहिए''। यह सुनते ही सजी महफिल ठहाके से गूंज उठी। जनाब यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि यहां जो पतंग ज्यादा उड़ेगी, वह बिना डोर की हो जाएगी। इसलिए अच्छा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बनकर रहिए। हर हाल में खुश रहिए।
दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी की हसरत है कि उन्हें पार्टी दिल्ली का चेहरा बना दे। तिवारी इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। तिवारी के सामने विजय गोयल हैं। विजय गोयल भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। तिवारी की ताकत दिल्ली में उ.प्र. खासकर पूर्वांचल और बिहार के लोग हैं। विरोध में विधूड़ी से लेकर दिल्ली के कई पुराने नेता हैं। तिवारी को बड़ा झटका तब लगा जब भाजपा हाईकमान ने उन्हें नचैया, गवैया की छवि से बाहर आने के लिए कहा। साथ ही, हिदायत दी कि वह राजनीतिक कार्यक्रमों में अपनी यह प्रतिभा जरा कम बिखेगें। वैसे भी दिल्ली के प्रभारी अब प्रकाश जावड़ेकर हैं।
जावड़ेकर को भाजपा ऐसे ही कड़े मोर्चे पर लगाती है। जावड़ेकर तिवारी टाइप पॉलिटिक्स के साथ-साथ गंभीर प्रोफेशनल पॉलिटिक्स को पसंद करते हैं। प्रकाश जावड़ेकर की टीम का भी मानना है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री की छवि को आगे करके चुनाव लड़ने की बजाय दिल्ली के किसी चेहरे को आगे किया जाए। ऐसे में मामला थोड़ा पेचीदा भी हो गया है। इसी पेचीदगी ने तिवारी की भी धड़कन बढ़ा दी है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजनीति में एक अजीब से मोड़ पर आकर खड़े हो गए हैं। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने अभी राजनीतिक गतिविधियों से खुद को बहुत सीमित कर लिया है। अब वह बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को अपनी सलाह ज्यादा दे रहे हैं। राहुल की जगह धीरे-धीरे प्रियंका मोर्चा संभाल रही हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के भीतर राहुल ब्रिगेड भी थोड़ा तंग चल रही है। इन सबके बीच कहा जा रहा है कि राहुल गांधी रणनीतिक कारणों से शांत हैं। वह दो साल बाद यानी 2021 में फिर सक्रिय होंगे। बताते हैं कि 2021 आते-आते केंद्र की वर्तमान मोदी सरकार के सामने जनता की नाराजगी विकराल रूप ले लेगी, क्योंकि केंद्र सरकार माइक्रो-इकोनामिक्स को लेकर कोई बड़ा कदम नहीं उठा रही है। ऐसे में लोगों को राहुल गांधी प्रासंगिक नजर आने लगेंगे। रणनीतिकारों का कहना है कि 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है और तब तक राहुल गांधी सरकार को कठघरे में खड़ा करके सक्रिय होंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी का इस्तीफा मंजूर होने और सोनिया गांधी के पदभार संभालने के बाद पुराने कांग्रेसियों के दिन लौट आए हैं। कुछ पूर्व महासचिव, जो राजनीति का चोला उतारकर चुपचाप घर बैठ गए थे, खबर है पिछले दिनों में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात की है। एक पुराने महासचिव ने खुद ही अपनी भूमिका तलाश कर सलाह देना भी शुरू कर दिया है। एक पुराने नेता ने बाकायदा कोषाध्यक्ष और एक महासचिव का सहारा लेकर अपनी बात कांग्रेस अध्यक्ष तक पहुंचा दी है। सुनने में आ रहा है कि जल्द ही सोनिया गांधी के वक्त वाले कई पुराने नेता फिर सक्रिय होने वाले हैं। वहीं युवा और राहुल गांधी के पार्टी में आगे लाए गए कई नेता एक अजीब सी स्थिति से गुजर रहे हैं।