चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर काफी समय से गुमनाम हैं। चर्चा में ही नहीं हैं, लेकिन पीके इन दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दोबारा सत्ता में लाने में कोशिशों में जुटे हैं। प्रशांत किशोर तृणमूल कांग्रेस के जमीनी प्रचार अभियान की दिशा को बदल चुके हैं। पीपुल टू पीपुल कॉन्टैक्ट के अभियान से लेकर प्रशांत किशोर ममता बनर्जी की छवि भी सुधारने में लगे हैं। प्रशांत किशोर की टीम ममता बनर्जी को मीडिया में बयान देने से लेकर हर मोड़ पर सलाह दे रही है।
पीके ने बनाई थी सुशासन बाबू की छवि
पश्चिम बंगाल के अलावा प्रशांत किशोर झारखंड में भी सक्रिय हैं। वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक सलाहकार और जद (यू) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। पीके के साथ सक्रिय सूत्र का कहना है कि बिहार में 2020 में विधानसभा चुनाव होना है, इस चुनाव में भी पीके की टीम नीतीश कुमार की छवि को चमकाने के लिए सक्रिय रहेगी। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में टीम पीके के साथ कर चुके सूत्र के अनुसार प्रशांत किशोर ने ही जन-जन तक नीतीश कुमार को सुशासन बाबू के रूप में प्रचारित किया दिया था। पीके गुरुवार को नीतीश कुमार के साथ मंच पर दिखे ते, इसके बाद से इस तरह के कयास तेज हो गए हैं कि अगले साल होने वाले चुनाव में वह फिर पर्दे के पीछे से भूमिका निभाएंगे।
पीएम और शाह से की थी मुलाकात
भाजपा के पश्चिम बंगाल के उपाध्यक्ष राजकमल पाठक का कहना है कि पहले ममता बनर्जी जय श्रीराम का नारा लगने पर गाड़ी से उतरकर कार्रवाई का निर्देश देती थीं। अब ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। ममता बनर्जी अपने लोगों को पैसे वापस करने के लिए कह रही हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष के साथ भेंट मुलाकात कर रही हैं। राजकमल का कहना है कि भाजपा का ग्राफ बढ़ने के कारण ममता बनर्जी के स्वभाव में बदलाव आया है। हो सकता है इसका कारण प्रशांत किशोर की सलाह ही हो, लेकिन इससे भी टीएमसी का भला नहीं होने वाला है। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव के बाद पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी।
भाजपा के एक और उपाध्यक्ष रॉबिन चटर्जी का भी कहना है कि ममता अब खुद को जितना चाहे बदल लें, लेकिन राज्य में भाजपा का ग्राफ काफी बढ़ गया है। अगली सरकार भाजपा की ही होगी। रहा सवाल ममता का क्या तो वह कब क्या करेंगी, कोई नहीं जानता? वह अपने लोगों पर भी विश्वास नहीं करतीं।