केरल की सियासी जंग अब धीरे-धीरे हिन्दुत्व बनाम विकास के बीच तब्दील होती दिख रही है। जनरक्षा यात्रा के जरिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बेशक अपने मिशन केरल की शुरुआत कर दी है।
लेकिन, वाम के खिलाफ छीड़े सियासी संग्राम में भाजपा अपने पुराने और आजमाए औजार हिन्दुत्व को ही धार देगी। शायद यही वजह है कि भाजपा ने 'मिशन केरल' के लिए वाम सरकार के खिलाफ शुरू अपने जनरक्षा यात्रा के दूसरे दिन यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को पदयात्रा में शामिल कराने का निर्णय लिया है।
बुधवार को केरल पहुंचकर योगी भाजपा की जनरक्षा यात्रा में शामिल होंगे। इस वक्त योगी को भाजपा में हिन्दुत्व का सबसे बड़े चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वैसे योगी को जनरक्षा यात्रा में शामिल कराने के मामले को लेकर भाजपा महासचिव अनिल जैन ने इसे सियासी चश्में से नहीं देखने की बात कही है।
जैन का कहना है कि येागी एक भाजपा कार्यकर्ता के नाते केरल की जनरक्षा यात्रा में शामिल हो रहे हैं। एक-एक कर पार्टी के सभी बडे नेता इसमें शामिल होंगे। हालांकि सियासी गलियारे में योगी को केरल के मैदान में उतारने को भाजपा के हिन्दूवादी कार्ड के रूप में देखा जा रहा है।
खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जनरक्षा यात्रा की शुरुआत कन्नुर जिले के तालीपरम्बा के सिद्ध राजराजेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर इसके संकेत दे दिए हैं। अब योगी के अलावा भाजपा ने केरल की पदयात्रा के पूरी ताकत झोंकने की तैयारी की है।
3 अक्टूबर से शुरू हुई जनरक्षा यात्रा में हरेक दिन केंद्र सरकार का एक शीर्ष मंत्री, संगठन का बड़ा नेता और राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। पीएम मोदी को छोड़ पार्टी ने लगभग अपने सभी बड़े नेताओं को केरल के जंग में उतारने की रणनीति बनाई है।
दिल्ली से केरल तक आवाज बुलंद करने की पुख्ता रणनीति
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वामपंथ के खिलाफ देश में माहौल बनाने के कवायद में भाजपा दिल्ली से केरल तक अपनी आवाज बुलंद करेगी। जहां एकओर कुन्नूर से शुरू जनरक्षा यात्रा में शामिल होकर पार्टी के बड़े नेता सूबे की वाम सरकार के खिलाफ हमला बोलेंगे।
तो वहीं पदयात्रा में उत्साह भरने के लिए पार्टी ने देशभर से युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं को पदयात्रा में शामिल कराने का निर्णय लिया है। हरेक दिन युवा मोर्चा की अलग-अलग प्रदेशों की टीम जनरक्षा यात्रा में शामिल होगी। युवा मोर्चा ने सभी राज्यों से 100 कार्यकर्ता केरल लेकर पहुंचने का फरमान जारी किया है।
बिहार के भाजयूमो कार्यकर्ता का जिम्मा 9 अक्टूबर को केरल पहुंचने का है। इसके अलावा दिल्ली में भी भाजपा के कार्यकर्ता पूरे पंद्रह दिन केरल की वाम सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। सभी जिलाअध्यक्षों को पार्टी ने एक-एक दिन विरोध-प्रदर्शन का जिम्मा सौंपा है।
वाम का पलटवार, हिन्दुत्व के सामने विजयन ने आगे किया विकास का एजेंडा
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अमित शाह के जरिए जनयात्रा की शुरुआत के बाद वाम ने भी भाजपा पर पलटवार किया है। पार्टी के हिन्दुत्व के एजेंडे के सामने केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने विकासवादी एजेंडे को आगे कर दिया है।
वैसे केरल में वाम की पहचान हिन्दुत्व की राजनीति रही है। कांग्रेस पार्टी वहां अल्पनसंख्यक समुदाय की नुमाइंदगी वाली पार्टी मानी जाती है। लेकिन अपना सियासी आधार बनाने के लिए भगवा परिवार ने वाम दल के खिलाफ हिन्दुत्व का कार्ड चला है। अपने कार्यकर्ताओं की हो रही हत्या को भगवा परिवार सीधे मुस्लिम आतंक की देन करार चूका है।
अब योगी के जरिए भाजपा सूबे में हिन्दूत्व के माहौल को गरमाने की जुगत में है। लेकिन भगवा परिवार के खिलाफ अपनी लडाई में वाम ने पैंतरा बदलते हुए विकास के एजेंडे को आगे कर दिया है।
केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भाजपा की जनरक्षा यात्रा पर कहा है कि केन्द्र सरकार के बड़े मंत्री और आरएसएस से जुड़े लोग केरल की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका विरोध होना चाहिए। तो दूसरी ओर उनकी पार्टी माकपा ने राजनीतिक हत्याओं में अपनी सरकार तथा नेतृत्व की संलिप्तता से इनकार करते हुए कहा है कि भाजपा और संघ सूबे के माहौल को खराब करने के मकसद से हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।
क्यों है भाजपा की जनरक्षा यात्रा?
केरल की वाम सरकार के खिलाफ 3 से 15 अक्टूबर तक चलने वाली भाजपा की जनरक्षा यात्रा की पटकथा बीते वर्ष अक्टूबर माह के अंत में हैदराबाद में संपन्न संघ की बैठक में ही लिखी जा चूकी थी।
यहां संघ ने केरल और पश्चिम बंगाल की सरकारों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर खुले जंग का ऐलान किया था। इस प्रस्ताव के बाद भाजपा ने भी अपनी दिशा तय कर ली और संघ के एजेंडे पर बढ़ना शुरू कर दिया। पश्चिम बंगाल में भगवा परिवार ने ममता सरकार के खिलाफ एंटी हिन्दुत्व की राजनीति का आरोप मढ़ा है।
तो केरल में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हो रही हत्याओं के मामले को लेकर उसने अपने पैर पसारने की रणनीति बनाई है। भाजपा अध्यक्ष के जरिए शुरू हुई जनरक्षा यात्रा भगवा परिवार के कार्यकर्ताओं के खिलाफ वाम दल के कथित ‘लाल आतंकवाद’ के विरोध में है।
भाजपा ने इस यात्रा की थीम ‘सभी को जीने का हक!! जिहादी-लाल आतंक के खिलाफ’ रखा है। भगवा परिवार का आरोप है कि वर्ष 2001 के बाद से राज्य में उनके 120 कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है जिनमें से 84 केवल कन्नूर में ही मारे गए।
उसमें भी 14 मामले मुख्यमंत्री के गृहनगर के हैं। यात्रा के पहले चरण में शाह यहां 5 अक्टूबर तक प्रवास करेंगे। इसके साथ पार्टी के सभी बड़े नेताओं को भी केरल के संग्राम में उतारा जाएगा।