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Malda Violence: पुलिस ने BJP प्रतिनिधिमंडल को हिंसा प्रभावित इलाके में जाने से रोका, समर्थकों ने किया चक्काजाम

Sun, 30 Mar 2025 03:01 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

मालदा में बुधवार को दो समुदायों में झड़प के बाद हिंसा बढ़ गई थी। इसे लेकर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में मालदा भाजपा प्रतिनिधिमंडल रविवार को मालदा जा रहा था। इसे पुलिस ने इंग्लिश बाजार के पास रोक दिया। इसके बाद भाजपा नेताओं ने सड़क पर जाम लगा दिया। 
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सुकांत मजूमदार - फोटो : ANI/@DrSukantaBJP
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विस्तार
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दो समुदायों के बीच झड़प और हिंसा को लेकर रविवार को केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में मालदा जिले के मोथाबारी जा रहे भाजपा प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने तीन किमी पहले इंग्लिश बाजार में रोक दिया। इसे लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए। गुस्साए नेताओं और समर्थकों ने सड़क जाम कर दिया। 
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भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि बंगाल के लोग देख रहे हैं कि यहां क्या हो रहा है। राज्य की पुलिस सत्तारूढ़ टीएमसी के कैडर के रूप में काम कर रही है। पुलिस ग्रामीणों को रामनवमी पूजा न करने का निर्देश कैसे दे सकती है? पुलिस ऐसा नहीं कर सकती। मैंने लोगों से बिना किसी डर के रामनवमी मनाने को कहा है।

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इससे पहले मजूमदार और उनकी पार्टी के सहयोगियों को मोथाबारी से 10 किमी पहले गांव की महिलाओं ने रोककर अत्याचार का आरोप लगाया। पुलिस ने कहा कि झड़प प्रभावित मोथाबारी में स्थिति शांतिपूर्ण है, जहां भारी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। इलाके में इंटरनेट सेवा ठप है। हालांकि रविवार सुबह बाजार और दुकानें खुलीं।

वहीं बंगाल के महानिरीक्षक (आईजी) राजेश यादव ने कहा कि मोथाबारी में अब स्थिति शांत हो रही है।  पिछले 48 घंटों में इलाके में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। दुकानें और बाजार खुले हैं और नियमित व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। हम दिन में बाद में इंटरनेट सेवाओं को फिर से शुरू करने या निलंबन के विस्तार पर फैसला करेंगे।
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धार्मिक स्थल के पास तनाव बढ़ने के बाद हुई हिंसा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बुधवार शाम एक धार्मिक जुलूस के बाद एक धार्मिक स्थल के पास तनाव बढ़ा, जिसके बाद गुरुवार को हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और हमले हुए। पुलिस ने बताया कि 50 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं कलकत्ता उच्च न्यायालय ने घटना को लेकर जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को तीन अप्रैल तक कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि राज्य को मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सावधानी से काम करना चाहिए। हिंसा प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

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