जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि विदेश से आने वाला पैसा कथित तौर से कश्मीर के कई नेताओं के खातों में जाता रहा है। बाद में उस पैसे को विभिन्न संगठनों के नाम पर आतंकियों तक पहुंचाया जाता है। जांच एजेन्सी का दावा है कि जल्द ही ऐसे लोग बेनकाब होंगे। पिछले साल एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकी फंडिंग के मामले में जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें कश्मीरी अलगाववादियों का नाम सामने आया था। इनमें कई कारोबारी भी थे जो रुपयों का लेन-देन और उसे आगे बढ़ाने के मामले में अलगाववादियों की मदद कर रहे थे।
आफताब हिलाली शाह उर्फ शाहिद-उल-इस्लाम, अयाज अकबर खांडे, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, नईम खान, अल्ताफ अहमद शाह, राजा महराजुद्दीन कलवाल और बशीर अहमद भट उर्फ पीर सैफुल्लाह पर आपराधिक साजिश और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप लगे थे।इनके अलावा जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित करने और पथराव करने वालों के लिए पाकिस्तान से धन प्राप्त करने का आरोप भी लगाया गया था।
अल्ताफ अहमद शाह हार्डलाइन हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद हैं, जो पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय की वकालत करते हैं। इस्लाम उदारवादी हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक का करीबी सहयोगी है। खांडे गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत के प्रवक्ता हैं। कश्मीर घाटी में अलगाववादियों और आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के लिए काम करने के आरोपी कारोबारी जहूर अहमद शाह वटाली को पिछले साल 17 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। वह कथित रूप से पाकिस्तान से धन इकट्ठा कर रहा था।
पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले आदिल डार और उसके साथियों, जिनकी संख्या करीब छह-सात है, को भी आर्थिक मदद पहुंचाई गई थी। आरडीएक्स और दूसरे विस्फोटकों को लाना, गाड़ी का इंतजाम व अन्य मदद, इन सब कामों के लिए जो पैसा खर्च हुआ, वह पाकिस्तान व दुबई से पहुंचा था। यह पैसा हवाला के जरिए लाया गया है। इसमें लोकल पुलिस की मदद से जांच एजेंसी ने प्रारंभिक तौर पर 35-40 अलगाववादी नेताओं के बैंक खाते चैक किए हैं।
एक स्थानीय बैंक के अलावा जिन एजेंसियों के जरिए विदेशों से धन मंगाया जाता है, उनसे भी पूछताछ चल रही है। इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि पुलवामा हमला और उससे पहले जैश के सदस्यों को समय-समय पर अलगाववादी व कुछ दूसरे स्थानीय कारोबारी आर्थिक मदद पहुंचा रहे थे। इतना ही नहीं, अगर किसी आतंकी को पाकिस्तान में किसी से बात करनी होती तो उन्हें कथित तौर पर अलगाववादी नेताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए होट लाइन या हाईटेक फोन मिल जाते हैं।
जांच एजेंसियों को प्रारंभिक तौर पर कुछ ऐसे सुराग भी मिले हैं कि शिक्षा दिलाने के नाम पर भोले-भाले कश्मीरी युवकों को पाकिस्तान भेज जाता है। अलगाववादी नेताओं के ठिकानों पर जो वीजा फार्म और आतंकवादी संगठनों के राइटिंग पैड मिले हैं, उनकी गहराई से जांच शुरु कर दी गई है। सूत्र बताते हैं कि अलगाववादी नेता आतंकियों के बड़े मददगार हैं, इस बाबत जांच एजेंसी ने पर्याप्त सबूत जुटा लिए हैं। बहुत जल्द पाकिस्तान के गुर्गों के चेहरे से नकाब हटा दिया जाएगा।