आग में जलने से पहले जनता ने पीटा था रामवृक्ष को।
- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
आपरेशन जवाहर बाग में रामवृक्ष समेत 27 कब्जाधारियों की मौत की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की कहानी कहती है कि इन सभी की जान दो कारणों से गई। पहले इन्हें जनता ने पीटा। दूसरी, ये भागते समय आग में गिर गए। इसे साबित करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का सहारा लिया जा रहा है। इसमें एक भी कब्जाधारी के शव में न तो गोली पाई गई थी और न ही इसका निशान। यही रिपोर्ट न्यायिक जांच आयोग के सामने रखे जाने की तैयारी चल रही है। इसमें यह भी बताया गया है कि रामवृक्ष ने पुलिस अफसरों पर गोली चलाई थी।
पुलिस ने अभी तक दर्ज 75 मुकदमों की जांच-पड़ताल तेज कर दी है। प्राथमिकता पर दो केस लिए गए हैं। पहला मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव की शहादत का। दूसरा कब्जाधारियों के दबंग नेता रामवृक्ष यादव की मौत का।
दोनों में आपस में संबंध भी है। पुलिस सूत्रों की मानें तो केस डायरी में लिखापढ़ी इस तरह से की जा रही है कि दोनों पुलिस अफसरों पर कब्जाधारियों के साथ रामवृक्ष ने भी गोली चलाई थी। इसके बाद वह अपने दफ्तर में आग लगाकर भाग रहा था। तभी आस पास के लोग पहुंच गए थे। उनकी पिटाई से ही वह घायल होकर आग में घिर गया। खुद की लगाई आग में ही उसकी जान निकल गई। पूरी रिपोर्ट में कहीं भी ऐसा कोई जिक्र नहीं है कि उसे पुलिस ने एक डंडा भी मारा।