एक नई टीनएज डाकू महारानी ने विंध्या की घाटी में रहकर मध्यप्रदेश पुलिस को नाको चने चबवा रखे हैं और प्रशासन के उस दावे को खारिज कर दिया कि इस क्षेत्र में अब कोई डाकू शेष नहीं रह गया है। पुलिस ने 19 साल की साधना पटेल के सिर पर 10,000 रुपए के ईनाम की घोषणा की थी। अफवाह के अनुसार जो 7 लोगों की टीम का नेतृत्व करती है। उसे गिरफ्तार करना पुलिस के लिए बहुत मुश्किल है क्योंकि उसके पास कोई तस्वीर नही थी और उसे स्थानीय कहानियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
13 सालों बाद किसी महिला
डाकू पर ईनाम घोषित किया गया था। इससे पहले 2005 में पुलिस ने रानी गौड़ पर 5,000 का ईनाम घोषित किया था, जो 2012 में हुई मुठभेड़ में मारी गई थी। साधना गैंग उस समय पनपा जब पिछले साल मुठभेड़ में डकैत ललित पटेल को मार गिराया गया था। सबसे पहले इसी साल 21 अगस्त को साधना गैंग के खिलाफ नयागांव के छोटकू सेन का अपहरण करने के लिए मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस सूत्रों ने कहा, 'सेन का इसलिए अपहरण किया गया था क्योंकि साधना को शक था कि उसके पास
छुपा हुआ खजाना है। उसने उसको प्रताड़ित किया और हाथ की एक अंगुली काट दी। पुलिस के दबाव की वजह से गैंग को उसे रिहा करना पड़ा।' उसने बाद में साधना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
माना जाता है कि साधना उत्तर प्रदेश के बाराहिया गांव की निवासी है जो अपने पिता की मौत के बाद नयागांव चली गई। पुलिस का कहना है कि उसकी चाची चुन्नीलाल पटेल की करीबी थी, जो डकैत था और 2015 में हुई मुठभेड़ में मारा गया था। ललित की मौत के बाद दूसरे डकैत दीपक ने एक गैंग बनाया जिसमें साधना शामिल हो गई।