जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव के परिवार वालों को पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है। 85 पन्नों की जो चार्जशीट दाखिल की गई है उसमें रामवृक्ष के बेटे, पत्नी और बेटियों को मुल्जिम नहीं बनाया गया है। राकेश गुप्ता की पत्नी और उसके तीन फाइनेंसर दोस्तों को भी बख्श दिया गया है। पुलिस की टीम ने बारह गवाहों के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार की है।
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स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन के नाम पर लोगों की भीड़ लेकर मार्च, 2014 में जवाहर बाग पर कब्जा जमाने वाला रामवृक्ष यादव मूलत: गाजीपुर जनपद में मरदह थाने के रायपुर बागपुर गांव का रहने वाला था। उसने वर्ष 2014 में ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया और मध्यप्रदेश से भीड़ लेकर निकल पड़ा।
जब ब्रज क्षेत्र में पहुंचातो उसकी योजना बदल गई और वो यहां जवाहर बाग में दो दिन के अनशन की अनुमति लेकर कब्जा जमाकर बैठ गया। उस वक्त रामवृक्ष के साथ उसकी पत्नी कलावती, बेटी गुड़िया और दो बेटे भी थे। रामवृक्ष का बड़ा बेटा बाकायदा रामवृक्ष के मिशन को सोशल मीडिया पर प्रचारित करता था।
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जवाहर बाग में होने वाले हर कार्यक्रम के प्रचार की योजना उसके ही हाथ में रहती थी। जिस वक्त प्रशासन जवाहर बाग खाली कराने के लिए जोड़तोड़ कर रहा था उस वक्त भी रामवृक्ष का बेटा अखबारों में छपने वाली खबरों को सोशल साइट्स पर डालकर लोगों को भड़का रहा था। लेकिन 2 जून को हुई हिंसा के बाद से रामवृक्ष के कुनबे का कहीं पता नहीं है।
अदालत के आदेश पर रामवृक्ष के डीएनए के लिए पुलिस कई दफा रामवृक्ष के गांव भी पहुंची लेकिन किसी का पता ही नहीं चला। गांव वालों का कहना है कि उन्होंने तो वर्षों से परिवार के किसी सदस्य को नहीं देखा है। अब यह कहां हैं कोई नहीं जानता। वहीं बदायूं निवासी राकेश गुप्ता भी अपने परिवार के साथ रहता था। उसके चार फाइनेंसर दोस्त भी थे जिन्हें पुलिस ने मुल्जिम नहीं बनाया है।
अब रामवृक्ष की मौत कैसे साबित करेगी पुलिस
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली
रामवृक्ष यादव मारा गया। 85 पन्नों की चार्जशीट में पुलिस ने इसका जिक्र 8 बार किया है लेकिन पुलिस के पास उसकी मौत का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। न तो परिवार वालों ने ही पहचान की और न ही कोई डीएनए रिपोर्ट पुलिस के पास है। अदालत भी उसे वांछित मान रही है।
दो जून को हुई जवाहर बाग हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। रामवृक्ष यादव मारा गया इसका खुलासा पुलिस ने दो दिन बाद किया था। दरअसल पुलिस ने जवाहर बाग से जले हुए शव बरामद किए थे, जिनमें से एक शव रामवृक्ष यादव के होने का दावा किया गया।
पुलिस का कहना था कि जेल में बंद रामवृक्ष यादव के साथी हरनाथ सिंह ने उसे पहचाना है। क्योंकि शव बुरी तरह से जल चुका था लिहाजा पहचान इतनी आसान भी नहीं थी। पुलिस ने लिखापढ़ी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम पर रखवा दिया।
छह नवंबर तक चलेगी न्यायिक आयोग की जांच
- फोटो : Amarujala
शासन ने जवाहर बाग हिंसा की जांच को न्यायिक आयोग का गठन किया है। हाईकोर्ट के रिटायर जज मिर्जा इम्तियाज मुर्तजा और मथुरा के सेवानिवृत्त जनपद न्यायाधीश पीके गोयल पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। पच्चीस जून से जांच चल रही है।
अभी तक 127 लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं। पहले सर्टिफिकेट लिए गए थे और बाद में गवाही हुई। मार्च 2014 से 2 जून 2016 तक जो भी अधिकारी मथुरा में रहे हैं उनके भी बयान होने हैं। एक-एक करके सभी को बुलाया जाना है।
भागने वालों को बचा रहा महकमा
तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को जवाहर बाग में कब्जाधारियों के बीच छोड़कर भागने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आज भी कार्रवाई के दायरे से बाहर हैं। एसपी सिटी के हमराह पर तो कार्रवाई हो गई लेकिन किसी अफसर पर एक्शन नहीं हुआ है।
चार्जशीट में भी इसका जिक्र नहीं किया गया है। प्रमुख सचिव गृह से लेकर डीजीपी तक कई दफा एक्शन की बात कर चुके हैं लेकिन हुआ कुछ नहीं। दो जून की शाम को जब मुकुल द्विवेदी जवाहर बाग खाली कराने निकले थे तब उनके साथ चार सीओ, दस से ज्यादा एसओ के साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी थे।
मगर जब एसपी सिटी पर कब्जाधारियों ने हमला किया तो सभी उन्हें छोड़कर भाग निकले। इन अफसरों पर कार्रवाई की मांग तभी से गूंज रही है। मुकुल द्विवेदी के परिवार वालों ने डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री तक से यह बात की लेकिन सभी ने अनसुना कर दिया है।
सत्र न्यायालय में चलेगा ट्रायल, चंदन बोस, वीरेश और राकेश गुप्ता पर लगी एनएसए
- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
जवाहर बाग हिंसा में पुलिस ने 101 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जेल में बंद मुल्जिमों को गवाहों के बयान की कापी भी रिसीव करा दी गई है। अब मुकदमे का ट्रायल शुरू होगा। ट्रायल सत्र न्यायालय में चलेगा।
पुलिस ने रामवृक्ष के गुर्गे चंदन बोस, वीरेश और राकेश गुप्ता पर एनएसए के तहत कार्रवाई कर दी है। पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की है उसमें बताया गया है कि यह तीनों ही मुख्य लोग थे जो रामवृक्ष के लिए हरसंभव मदद मुहैया करते थे। आर्थिक मदद भी इनके माध्यम से ही उपलब्ध कराई जा रही थी।