पश्चिम बंगाल पुलिस ने रविवार को एक बार फिर इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी को उनके निर्वाचन क्षेत्र में जाने से रोक दिया। बीते तीन दिनों में यह दूसरी बार है जब सिद्दीकी को उनके निर्वाचन क्षेत्र भांगर में जानें से रोका गया है। पुलिस ने सिद्दीकी के रोके जाने के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। पुलिस का कहना है कि पंचायत चुनाव से संबंधित हिंसा से प्रभावित क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू है। गौरतलब है कि भांगर, पंचायत चुनाव से पहले और बाद में हिंसा की वजह से काफी चर्चा में रहा है।
वहीं,आईएसएफ विधायक ने दावा किया है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक को दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर में जाने की अनुमति दी गई थी। जबकि उन्हें नहीं दी गई। सिद्दीकी ने कहा कि वह इसके खिलाफ कानूनी कदम उठाएंगे। इस दौरान उन्होंने राज्य की टीएमसी सरकार पर उनके आंदोलन को प्रतिबंधित करने का भी आरोप लगाया।
जानकारी के मुताबिक, विधायक नौशाद सिद्दीकी की कार को बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय की पुलिस ने भांगर की सीमा के बाहर हातीशाला में रोक दिया। साथ ही उनसे भांगर इलाके का दौरा न करने की गुजारिश की। पुलिस ने उन्हें बताया कि हिंसा के बाद सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। ये तब हुआ जब वह दक्षिण 24 परगना के भांगर जा रहे थे।
हालांकि इस दौरान उन्होंने पैदल ही अपने निर्वाचन क्षेत्र की ओर जाने पर जोर दिया लेकिन इसकी भी अनुमति नहीं दी गई। इस पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि कैनिंग पुरबा विधायक सौकत मुल्ला जैसे टीएमसी नेताओं को भांगर जाने की अनुमति दी गई थी। ऐसा लगता है कि धारा 144 उन पर लागू नहीं है। निरंकुश पुलिस द्वारा मुझे मेरे निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से मिलने से रोका जा रहा है।
सिद्दीकी ने कहा कि भांगर के लोग अब गंभीर स्थिति में हैं। उन्हें टीएमसी के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। मेरे कई समर्थक मारे गए। मैं उनके परिवारों और दोस्तों से उनकी व्यथा सुनने के लिए और मिलने क्यों नहीं जा सकता?
वहीं, टीएमसी विधायक सौकत मुल्ला ने कहा कि सिद्दीकी अशांति फैलाने के लिए भांगर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए अपना काम कर रही है कि और हत्याएं न हों।
बता दें कि आईएसएफ नेता को इससे पहले 14 जुलाई को पुलिस ने इसी तरह से भांगर में प्रवेश करने से रोक दिया था। आठ जून से लेकर अब तक भांगर में पंचायत चुनाव संबंधी हिंसा में कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है।