फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Explainer: PoJK में गोलियों की गूंज, कश्मीर में जोजिला के जश्न का शोर; देखें विकास की पटरी पर कौन-कहां खड़ा?

Wed, 10 Jun 2026 01:13 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कश्मीर की दो तस्वीरें आज पूरी दुनिया के सामने हैं। नियंत्रण रेखा के एक तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन, गोलियां, इंटरनेट बंदी और महंगाई को लेकर गुस्सा दिखाई दे रहा है। वहीं दूसरी तरफ भारत के जम्मू-कश्मीर में जोजिला सुरंग जैसी बड़ी परियोजनाओं के जरिए विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। एक ओर लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सड़क, रेल, पर्यटन और कनेक्टिविटी नई उम्मीदें पैदा कर रहे हैं। आइए, विस्तार से कश्मीर की इन दोनों तस्वीरों को समझते हैं और जानने की कोशिश करते हैं विकास की पटरी पर कौन-कहां है...
विज्ञापन
एक कश्मीर, दो तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एक तरफ पत्थर-धुआं और सन्नाटा, तो दूसरी तरफ सुरंगों में विकास का उजाला... कश्मीर की दो अलग-अलग तस्वीरें एक बार फिर दुनिया के सामने आई हैं। नियंत्रण रेखा यानी एलओसी के एक तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके में विरोध, हिंसा, इंटरनेट बंदी और गोलीबारी की खबरें हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जोजिला सुरंग की बड़ी कामयाबी का जश्न मनाया जा रहा है। एक ओर लोग महंगाई, बिजली संकट और राजनीतिक दमन के खिलाफ सड़कों पर हैं, तो दूसरी ओर विकास परियोजनाएं, पर्यटन और कनेक्टिविटी नए रिकॉर्ड बना रही हैं। यही वजह है कि कश्मीर की दोनों तस्वीरों की तुलना अब तेजी से चर्चा में है।

पहले बात पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की

  • पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके में पिछले कई महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग महंगाई, बिजली संकट और बेरोजगारी से परेशान हैं।
  • पीओजेके के रावलकोट, मुजफ्फराबाद और मीरपुर जैसे इलाकों में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई जगहों पर पाकिस्तान विरोधी नारे भी लगे हैं।
  • वहां आटे, बिजली और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। आम लोग कह रहे हैं कि जिंदगी चलाना मुश्किल हो गया है।
  • प्रदर्शन रोकने के लिए पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां सख्त कार्रवाई कर रही हैं। कई जगह गोलीबारी, आंसू गैस और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं।
  • इंटरनेट सेवाएं कई बार बंद की गईं ताकि विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो बाहर न जा सकें। इससे लोगों में और नाराजगी बढ़ी है।
  • जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेएएसी नाम का संगठन लगातार आंदोलन चला रहा है। यह संगठन बिजली बिल कम करने, सस्ता आटा देने और राजनीतिक अधिकार बढ़ाने की मांग कर रहा है।
  • पीओजेके के लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान वहां के संसाधनों का इस्तेमाल करता है, लेकिन स्थानीय लोगों को उसका फायदा नहीं मिलता।
  • गिलगित-बाल्टिस्तान में भी हालात तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। वहां भी लोग राजनीतिक अधिकार और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
  • विशेषज्ञ मानते हैं कि पीओजेके में लगातार बढ़ता असंतोष पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। वहां जनता अब खुलकर प्रशासन और नीतियों पर सवाल उठाने लगी है।

पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन की आग में जल रहा पीओजेके

पीओजेके के रावलकोट, मुजफ्फराबाद और मीरपुर जैसे इलाकों में पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। लोग महंगी बिजली, आटे की बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और राजनीतिक अधिकारों की कमी को लेकर नाराज हैं। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। रिपोर्टों के मुताबिक हाल के संघर्षों में कई लोगों की मौत हुई है। इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया।
विज्ञापन


पीओजेके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेएएसी नाम का संगठन लगातार आंदोलन चला रहा है। यह संगठन पहले बिजली और आटे की कीमतों को लेकर बना था, लेकिन अब यह आंदोलन राजनीतिक अधिकार और स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी की मांग तक पहुंच गया है। कई जगहों पर पाकिस्तान विरोधी नारे भी सुनाई दिए हैं।

पीओजेके में हर साल क्यों भड़कते हैं आंदोलन?

पीओजेके में बिजली संकट, महंगाई और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर लंबे समय से असंतोष है। 2024 और 2025 में भी बड़े प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार स्थानीय लोगों की बजाय बाहरी प्रभाव को ज्यादा महत्व देती है। कई लोग अधिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं।

इन आंदोलनों के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हिंसक झड़पें हुईं। रिपोर्टों के अनुसार आंसू गैस, गोलियों और गिरफ्तारियों का इस्तेमाल किया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान से आजादी के नारे भी लगाए। इससे इस्लामाबाद की चिंता बढ़ गई है।

विकास के रथ पर सवार भारत का जम्मू-कश्मीर

इसी बीच जम्मू-कश्मीर की एक दूसरी और बेहतरीन तस्वीर भी है। वहां जम्मू से लेकर लद्दाख तक विकास की गाथा लिखी जा रही है। हाल ही में लद्दाख में जोजिला सुरंग परियोजना ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। 9 जून यानी मंगलवार को इंजीनियरों ने सुरंग के दोनों सिरों को जोड़ने का काम पूरा किया। यह 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग है, जो तैयार होने के बाद एशिया की सबसे लंबी दोतरफा सड़क सुरंगों में शामिल होगी।
विज्ञापन


करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर बन रही यह सुरंग श्रीनगर को लद्दाख से हर मौसम में जोड़कर रखेगी। अभी भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में कई महीने तक यह इलाका देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। सुरंग बनने के बाद यात्रा का समय घटेगा और सेना की आवाजाही भी आसान होगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसे रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम परियोजना बताया।

भारत का जम्मू-कश्मीर कैसे गढ़ रहा विकास की नई परिभाषा?

  • जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में सड़क, सुरंग और रेल परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है। जोजिला सुरंग, चिनाब रेल पुल और जम्मू-श्रीनगर रेल लिंक जैसी परियोजनाएं विकास की नई तस्वीर पेश कर रही हैं।
  • कश्मीर घाटी में पर्यटन ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिससे होटल, टैक्सी, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारियों की आमदनी बढ़ी है।
  • वंदे भारत ट्रेन और नई हाईवे परियोजनाओं ने जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से और मजबूत तरीके से जोड़ना शुरू कर दिया है। इससे यात्रा आसान और तेज हुई है।
  • केंद्र सरकार ने निवेश बढ़ाने के लिए कई नई नीतियां लागू की हैं। उद्योग, होटल, आईटी और कृषि क्षेत्र में बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं।
  • जम्मू-कश्मीर में स्टार्टअप संस्कृति भी तेजी से बढ़ रही है। युवा अब नौकरी खोजने के बजाय खुद का कारोबार शुरू करने की ओर बढ़ रहे हैं।
  • बिजली, डिजिटल नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार से दूरदराज के इलाकों तक भी विकास पहुंच रहा है। गांवों में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी मजबूत हुई है।
  • शिक्षा क्षेत्र में नए कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और स्किल सेंटर खोले गए हैं। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर मिलने लगे हैं।
  • सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद पत्थरबाजी और लंबे बंद जैसे हालात काफी कम हुए हैं। इससे आम लोगों का जीवन और व्यापार सामान्य हुआ है।
  • सेना और प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों में सड़क और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। इससे रणनीतिक रूप से भी जम्मू-कश्मीर की स्थिति मजबूत हुई है।

भारत के जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में क्या बदलाव हुए?

पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर में सड़क, रेलवे, सुरंग, बिजली और पर्यटन क्षेत्र में बड़े निवेश हुए हैं। जोजिला सुरंग के अलावा जेड-मोड़ सुरंग, चिनाब रेल पुल और जम्मू-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक जैसी परियोजनाओं ने इलाके की तस्वीर बदल दी है। वंदे भारत ट्रेन का कश्मीर तक पहुंचना भी बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में निवेश और रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 तक निवेश प्रस्ताव 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गए। स्टार्टअप की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। पर्यटन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है और स्थानीय कारोबार को फायदा मिला है।
 

दोनों तरफ के हालात अब साफ अंतर दिखा रहे

नियंत्रण रेखा के दोनों ओर हालात अब बिल्कुल अलग दिशा में बढ़ रहे हैं। भारत वाले हिस्से में जहां इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और निवेश पर जोर दिख रहा है, वहीं पीओके में जनता बुनियादी सुविधाओं और राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है।जम्मू-कश्मीर में बढ़ता विकास पाकिस्तान के लिए चिंता का कारण बन रहा है। यही वजह है कि सीमा पार तनाव और आतंकी गतिविधियों के जरिए माहौल खराब करने की कोशिशें भी जारी रहती हैं। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा उचित समय पर बहाल किया जाएगा और विकास की रफ्तार आगे भी जारी रहेगी।

कश्मीर की इन दो तस्वीरों का बड़ा संदेश क्या?

नौ जून की तस्वीरें बहुत कुछ बयान करती हैं। एक तरफ पीओके में विरोध, बंदूकें और डर का माहौल था। दूसरी तरफ हिमालय के नीचे इंजीनियर सुरंग के भीतर विकास का जश्न मना रहे थे। यह सिर्फ दो घटनाएं नहीं थीं, बल्कि कश्मीर के दो अलग रास्तों की तस्वीर थीं। एक ओर अस्थिरता और असंतोष है, तो दूसरी ओर सड़क, रेल, सुरंग और पर्यटन के जरिए बदलती जिंदगी की कहानी दिखाई दे रही है। यही वजह है कि अब कश्मीर पर बहस सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि जमीन पर बदलते हालात भी चर्चा का केंद्र बन गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें