पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में शुरू हुआ आंदोलन नागरिक विद्रोह है जो जल्द थमने वाला नहीं है। रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आर्थिक रूप से पिछड़ेपन, शिक्षा के अवसरों की कमी, रोजगार न होने जैसी चीजों ने इस आंदोलन को तेज गति से भड़कने में मदद दी है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार कमर आगा ने अमर उजाला से कहा पीओजेके एक गंभीर राजनीतिक-नागरिक संकट की ओर बढ़ रहा है। बुनियादी चीजों से आगे बढ़ कर अब यह आंदोलन संरचनात्मक सुधार की मांग तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा, यह आंदोलन आसानी से नहीं रुकेगा। यह नागरिक विद्रोह है, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। आगा ने कहा यह इलाका बहुत ज्यादा पिछड़ा है। ढंग के स्कूल-कॉलेज नहीं खुले। बिजली बनती है तो चीन चली जाती है, स्थानीय लोगों को कुछ नहीं मिलता। लोग लंबे समय से आधारभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
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आर्थिक संकट से सबसे प्रभावित है पीओजेके
दरअसल, पाकिस्तान में जारी आर्थिक संकट का सबसे बुरा असर पीओजेके पर पड़ा है। खाद्य सामग्री, ईंधन और बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों की कीमतें बेतहाशा बढ़ गई हैं, जिससे आम लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान में पीओजेके के नागरिकों को दोयम दर्ज का माना जाता है। यहां बिजली का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, मगर स्थानीय लोगों को इसके इस्तेमाल के लिए ऊंची कीमत चुकानी पड़ती है। यह ऐसा मुद्दा है जिसने जनता के गुस्से को भड़काया है। जनता में भावना है कि पाकिस्तानी सरकार पीओके के संसाधनों का शोषण कर रही है।
आगे किस दिशा में जाएगा विद्रोह, यह बड़ा सवाल
कमर आगा कहते हैं पीओजेके का एक बड़ा वर्ग भारत से जुड़ना चाहता है। वहीं, भूराजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन आलोक बंसल ने कहा कि मुजफ्फराबाद में आम लोग पाकिस्तानी सेना की प्रशासनिक मामलों में दखलअंदाजी के खिलाफ आवाजें उठाने लगे हैं, लेकिन अभी ये अपने दम पर पाकिस्तान के आधिपत्य से खुद को छुड़ा पाने में अक्षम हैं।
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अवामी एक्शन कमेटी की ध्यान देने की अपील
जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से पीओजेके में जारी संकट पर फौरन ध्यान देने की अपील की है। नजीर ने कहा, एक शांतिपूर्ण जनांदोलन सरकार की दमनात्मक कार्रवाई, मानवाधिकार उल्लंघन और निर्दोष लोगों की हत्या का सामना कर रहा है।