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टिप्पणी: 'एक बार आई लव यू कहना लड़की की गरिमा का अपमान नहीं', पॉक्सो में गिरफ्तार युवक को छोड़ते वक्त विशेष कोर्ट का अहम बयान

Wed, 23 Feb 2022 09:43 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

अदालत के मुताबिक, घटना वाले दिन आरोपी ने पीड़िता को ‘आई लव यू’ कहा इसके बाद आरोपी ने कभी पीड़िता का पीछा नहीं किया और न ही बार-बार ‘आई लव यू’ कहा।
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कोर्ट। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पॉक्सो के तहत गिरफ्तार युवक को छोड़ने का आदेश देते हुए एक विशेष अदालत ने कहा, एक बार ‘आई  लव यू’ कहने से लड़की की गरिमा का अपमान नहीं होता, ज्यादा से ज्यादा यह प्रेम की अभिव्यक्ति भर है। इस मामले में विशेष जज कल्पना पाटिल ने बुधवार को एक विस्तृत आदेश देते हुए यह टिप्पणी की।

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एक 17 वर्षीय लड़की के परिवार की तरफ से 2016 में दर्ज शिकायत के मुताबिक आरोपी ने लड़की से कहा था कि वह उससे प्रेम करता है। शिकायत में अरोप लगाया गया है, आरोपी (23) ने लड़की को घूरा, भद्दा इशारा किया और लड़की की मां को धमकी दी। 

शिकायत के आधार पर वड़ाला टीटी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के  संरक्षण का अधिनियम (पॉक्सो) के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में युवक को सभी आरोपों से बरी कर दिया। 
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अदालत के मुताबिक, घटना वाले दिन आरोपी ने पीड़िता को ‘आई लव यू’ कहा इसके बाद आरोपी ने कभी पीड़िता का पीछा नहीं किया और न ही बार-बार ‘आई लव यू’ कहा। अदालत ने आगे कहा, एकाध बार ‘आई लव यू’ कहने से पीड़िता की गरिमा आहत नहीं होती।

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पॉक्सो मामले में जमानत के लिए प्रेम संबंध आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट 

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पॉक्सो मामले में जमानत पाने के लिए किशोरी और आरोपी के बीच प्रेम संबंध और फिर शादी के लिए इनकार करने को आधार नहीं बनाया जा सकता। यह कहते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत आरोपी को जमानत देने के झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। 

पीठ ने कहा, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका को अनुमति देने में स्पष्ट गलती की है। यही वजह है कि धारा 164 और  एफआईआर में दर्ज बयान से लगता है कि याचिकाकर्ता और आरोपी के बीच प्रेम संबंध थे और इस केस को आरोपी द्वारा शादी से इनकार करने के तौर पर दर्ज किया गया। 
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