साथ ही याचिका में यह भी मांग की गई है कि वित्त मंत्रालय को निर्देश दिया जाए कि वह बड़ी राशि के लोन को लेकर एक दिशानिर्देश बनाए। वहीं इस पूरे मामले में दायर याचिका के खिलाफ केंद्र सरकार ने रोक लगाने और स्वतंत्र जांच कराने से इंकार किया है।
10 करोड़ और उससे अधिक के लोन को लेकर वित्त मंत्रालय और रिजर्ब बैंक को दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया जाए, जिससे लोन वसूली सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई जानी चाहिए जो देश में बैड लोन की पूरी जानकारी इकट्ठा करें।
डिफॉल्टरों से एक नियत समय के भीतर लोन वसूली का नियम बनाना चाहिए। उनकी संपत्तियों को जब्त कर उनकी नीलामी की जानी चाहिए। इस पूरे मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ करेगी।