पीएमओ ने गृह मंत्रालय को दिए निर्देश
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साल 2001 से साल 2006 तक वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर मंत्रियों और उद्योगपतियों के फोन टैप किए जाने के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सख्त रुख अपनाया है। पीएमओ ने पूरे मामले में गृह मंत्रालय से रिपोर्ट तलब करते हुए जांच और कार्रवाई का साफ निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि एस्सार कंपनी की ओर से नेताओं और उद्योगपतियों के कथित तौर पर फोन टैप किए जाने का मामला सामने आने के बाद राजनीति गरमा गई है। विपक्ष इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़ा करता रहा है। जबकि एस्सार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। हालांकि फोन टैपिंग मामले की जांच के लिए पीएमओ का दरवाजा खटखटाने वाले सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुरेन उप्पल अपने दावे पर कायम हैं।
गौरतलब है कि उप्पल ने 1 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शीर्ष नेताओं और उद्योगपतियों का फोन टैप किए जाने की शिकायत की थी। उनका दावा था कि एस्सार के पूर्व अधिकारी बासित खान ने उन्हें इस संबंध में जानकारी दी थी।
उप्पल ने इस संबंध में पुख्ता सबूत होने का दावा किया था। उनका कहना है कि एस्सार ने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में एस्सार गेस्टहाउस और मुंबई के महालक्ष्मी में बने एस्सार हाउस के बेसमेंट में फोन टैपिंग की थी। उस दौरान हच मोबाइल सेवा और मुंबई में बीपीएल की लूप मोबाइल सेवा एस्सार कंपनी ही देती थी।
हालांकि बासित खान ने उप्पल के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अधिवक्ता औद्योगिक घराने को ब्लैकमेल करना चाहते हैं। खान ने दावा किया कि उन्हें ये टेप मुंबई क्राइम सेल के एक अधिकारी ने दिए थे। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर जाना जाने वाला उक्त अधिकारी एक आतंकी हमले में शहीद हो गया। हालांकि बासित ने स्वीकार किया है कि ये टेप उसी ने उप्पल को उपलब्ध कराए थे। इस बीच एस्सार ने भी फोन टैपिंग से पल्ला झाड़ते हुए इस मामले की जांच की मांग की है।
Published By Rahul Sankrityayan