देश की शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने और संचालित करने का भार जिन संस्थाओं के कंधों पर है, वह संस्थाएं ही बीमार हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए गठित सुब्र्हमण्यम कमेटी ने यूजीसी, एनसीईआरटी, एआईसीटीई, एनआईओएस, इग्नू जैसी संस्थाओं में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने का सुझाव दिया है। कमेटी का मानना है कि देश की तकनीकी शिक्षा को संचालित करने वाली संस्था एआईसीटीई पूरी तरह अपने काम में फेल हो गयी है। इस संस्था में तत्काल प्रशासनिक सुधार के लिए तत्काल कॉ कमेटी के सुझाव को लागू किया जाना चाहिए। वहीं, यूजीसी एक्ट को समाप्त करने का भी सिफारिश की गयी है।
फीकी और सीआईआई जैसी संस्थाओं ने कुछ समय पूर्व एक रिपोर्ट में यह माना था कि देश में केवल बीस फीसदी इंजीनियरिंग व तकनीकी संस्थान ऐसे हैं, जहां के ग्रेजुएट छात्र इंडस्ट्री में नौकरी पाने योग्य हैं। यह तथ्य एआईसीटीई के नियामक दायित्वों के पूरी तरह फेल होने का संकेत है। वहीं, यूजीसी एक्ट की जगह न्यू नेशनल हायर एजुकेशन एक्ट लाने का सुझाव दिया है।
गरीब बच्चों के लिए दस लाख रुपये सालाना फेलाशिप का सुझाव
उच्च शिक्षा में सुब्रह्मण्यम कमेटी ने नेशनल हायर एजुकेशन फंड बनाए जाने का सुझाव दिया है। इसके तहत उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले गरीब बच्चों को दस लाख रुपये सालाना तक फेलोशिप देने की सिफारिश करने की गयी है। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल टेलेंट हट के जरिए मेधावी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप स्कीम का सुझाव है, जोकि 12वीं कक्षा के बाद पढने वाले बच्चों के लिए होगा। इसमें सभी वर्गों के मेधावी बच्चे शामिल होंगे।
कृषि विषय को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने पर जोर
कमेटी ने कृषि विषय को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने का सुझाव दिया है। इसकेलिए एनसीईआरटी को नेशनल करीकुलम फ्रेमवर्क में कृषि विषय को शामिल करने का सिफारिश की है। कृषि शिक्षा में सुधार के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च और नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट को कृषि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए विशेष रिपोर्ट बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मिड डे मील प्राइमरी तक सभी बच्चों को मिले
मिड डे मील प्राइमरी स्कूल में पढने वाले सभी बच्चों को उपलब्ध करवाया जाए। फिलहाल सरकारी स्कूलों तक सीमित है। इसके साथ ही मिड डे मील का क्राइटीरिया आठवीं कक्षा तक के बच्चों को उपलब्ध करवाने का भी सुझाव कमेटी ने दिया है।
भाषा के संबंध में प्राइमरी स्तर पर राज्यों में संचालित स्कूल में मातृभाषा (स्थानीय भाषा) में पढ़ाई के लिए निर्देश देने का भी सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में हिंदी को पूरे भारत केविभिन्न भाषा-भाषी लोगोंको आपस में संवाद केलिए हिंदी को माध्यम बनाने पर जोर दिया है।
प्राइवेट टयूशन कल्चर पर कमेटी ने विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि स्कूली स्तर पर पाठयक्रम का दबाव बच्चों को मजबूर करता है। बच्चों के तनाव को कम करने के लिए स्कूली पाठयक्रम में बदलाव की जरूरत का सुझाव दिया है।
Published By Rahul Sankrityayan