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लॉकडाउन 2.0 की पटकथा, जिसे लिखने में पीएम मोदी और उनके दर्जनों सिपहसालारों को लगे 144 घंटे

Sat, 18 Apr 2020 08:28 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत एक अधिकारी के अनुसार, पीएम कार्यालय में रोजाना तीन बार कोरोना के केसों की रिपोर्ट पहुंचती है। अगर कोई नया हॉटस्पॉट सामने आता है तो वह जानकारी भी बताई जाती है।
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केंद्रीय कैबिनेट - फोटो : PTI
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विस्तार
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लॉकडाउन 2.0  की पटकथा लिखने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दर्जनों सिपहसालारों को 144 घंटे लग गए थे। छह अप्रैल को यह तय हो गया था कि कोरोना के वायरस का मुकाबला करने के लिए लॉकडाउन 1.0 पर्याप्त नहीं है, इसे आगे बढ़ाना होगा।

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फिर 6 अप्रैल को जब देश में कोरोना के मामलों की संख्या 4 हजार के पार पहुंच गई और मरने वालों का आंकड़ा भी 107 हो गया था, तब पीएम मोदी ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों से बातचीत की। इसके बाद कैबिनेट सचिव, गृह सचिव और पीएम के सलाहकार लॉकडाउन 2.0 की रूपरेखा तय करने में जुट गए।

तब 144 घंटे में करीब 17 वीडियो कांफ्रेंस हुई, जिनमें मोदी का मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करना भी शामिल था। कौन से मंत्रालय की किस गतिविधि को छूट मिले, फसली सीजन, क्वारंटीन सेंटर और हॉटस्पॉट आदि विषयों को लेकर मंत्रियों से 20-20 प्वाइंट में होमवर्क करने के लिए कहा गया।
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इसके बाद 14 अप्रैल से मंत्री और टॉप बॉस अपने कार्यालयों में बैठेंगे, ये सब निर्णय इसी पटकथा का हिस्सा रहे हैं।

6 से 11 अप्रैल, इन पांच दिनों में देखिए क्या-क्या हुआ

केंद्र सरकार में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत एक अधिकारी के अनुसार, पीएम कार्यालय में रोजाना तीन बार कोरोना के केसों की रिपोर्ट पहुंचती है। अगर कोई नया हॉटस्पॉट सामने आता है तो वह जानकारी भी बताई जाती है।

लॉकडाउन-1 को लेकर छह अप्रैल को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। आंकड़े चौंकाने वाले थे, क्योंकि केस लगातार बढ़ रहे थे और 107 से अधिक लोग कोरोना के चलते जान गंवा चुके थे।

पीएम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा व गृह सचिव अजय भल्ला को साथ बैठाकर अपने दूसरे सहयोगियों से वीडियो कॉंफ्रेंसिंग पर बात की। मंत्रियों को यह इशारा कर दिया गया था कि लॉकडाउन 2.0 की जरूरत पड़ेगी।

इसके बाद 7-8 अप्रैल को राज्यों के मुख्यसचिवों के साथ लॉकडाउन 2.0 को लेकर बात हुई। इसमें कृषि क्षेत्र और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर भी चर्चा की गई।

साथ ही क्वारंटीन क्षेत्र में सख्ती बढ़ाने के लिए कहा गया और 9 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, डब्लूएचओ प्रतिनिधि और पीएमओ के सलाहकारों की बातचीत हुई। बैठक में कहा गया कि अभी दो सप्ताह तक कोरोना के केस बढ़ेंगे।

11 अप्रैल को पीएम ने मंत्रियों से कहा, अपने कार्यालय से काम करें

गृह मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि 11 अप्रैल से पहले यह तय हो चुका था कि अब मंत्रियों को विभिन्न राज्यों के साथ सामंजस्य बनाना होगा। खास बात है कि इसमें विभिन्न पार्टियों के स्थानीय नेताओं को भी जिम्मेदारी देने की बात हुई थी।

इसमें कृषि कार्य में सहयोग, जरूरी वस्तुओं की सप्लाई और क्वारंटीन में लोगों की सुविधाओं पर नजर रखना आदि शामिल था। इसके बाद पीएम ने अपने सहयोगियों से कहा कि वे कार्यालय आ जाएं। 11 अप्रैल को ही पीएम ने वीडियो कॉंफ्रेंसिंग पर मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की।

इसके बाद पीएमओ में एक अलग से बैठक हुई। इसमें पीएम के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा, एनएसए अजीत डोभाल, प्रमुख सलाहकार पीके सिन्हा, एडवाइजर अमरजीत सिन्हा, अतिरिक्त सचिव अरविंद शर्मा, संयुक्त सचिव गोपाल बागले, वी. शेषाद्री, डॉ. श्रीकर केशव और डॉ. हीरेन जोशी आदि मौजूद रहे। यह तय हुआ कि पीएम के संबोधन के बाद लॉकडाउन 2.0 लागू हो जाएगा।

अब हॉटस्पॉट बनाकर कोरोना को खत्म किया जाएगा

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, स्वास्थ्य विभाग की सचिव प्रीति सूदन और राज्यों के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशकों के साथ बातचीत कर यह तय किया गया कि अब देश को हॉटस्पॉट के आधार पर बांटेंगे।

कहां पर केस कम हैं, कहां ज्यादा हैं और किस क्षेत्र में कितनी तेजी से केस बढ़े हैं, यह होमवर्क करने के बाद कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, पीएमओ में अतिरिक्त सचिव रचना शाह, जेएस डॉ. अमनदीप गर्ग, पंकज अग्रवाल और राज्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले संदीप सरकार ने बैठक की।

इसमें सचिव 'समन्वय' डॉ. वीपी जॉय, एएस ए. गिरधर और जेएस भारत खेड़ा भी मौजूद थे। गृह मंत्रालय की ओर से अजय भल्ला, एएस पीके श्रीवास्तव, गोविंद मोहन, ज्ञानेश कुमार और एफए रजीत पुन्हानी ने बातचीत की।

स्वास्थ्य विभाग की सचिव प्रीति सूदन एवं उनके कई सहयोगी अफसरों ने भी इस बैठक में शिकरत की। इसमें चर्चा हुई कि जिन जिलों में एक भी केस नहीं है वहां लॉकडाउन में कैसी ढील दी जा सकती है।

कुछ गतिविधियां शुरू हो सकती हैं या नहीं, विभिन्न अधिकारियों ने इस बाबत कई मॉडल प्रस्तुत किए गए। कारोबार के लिए दुकान या ई कॉमर्स, कौन सा विकल्प बेहतर होगा, इस पर चर्चा हुई। कितने राज्यों में लॉकडाउन-1 के दौरान मनमर्जी हुई।

कहां पर गृह मंत्रालय की सलाह ठीक से नहीं मानी गई, ये प्वाइंट भी सामने आए। कितने विभागों को और कैसी छूट दी जाएगी, इस विषय पर दो-तीन बार माथापच्ची हुई। गृह मंत्रालय को दो बार यह रिपोर्ट तैयार करनी पड़ी।

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यह सारा होमवर्क 11 अप्रैल तक कर लिया गया। अब केवल इंतजार था पीएम की घोषणा का। मोदी की घोषणा के बाद 15 अप्रैल से लॉकडाउन 2.0 लागू हो गया। 

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