खर्च के दबाव के साथ ही राजस्व वृद्धि के मामले में भी हालात ठीक नहीं हैं। सरकार ने वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) से हर महीने एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का लक्ष्य रखा था, जो अब तक हासिल नहीं हो पाया है। वहीं, संपत्तियों की बिक्री से भी सरकार को अनुमानित आय नहीं हो पाई। वित्तीय घाटा बजटीय लक्ष्य के 114.8 फीसदी पर है।
भरपाई के लिए आरबीआई पर बढ़ेगा दबाव
अगर सरकार वित्तीय घाटे के लक्ष्य को 3.3 फीसदी रखना चाहती है तो उसे सरकार के खर्च में कटौती करनी होगी। अंतरिम बजट में लोक-लुभावन घोषणाओं के बाद लागू करने से सरकार का खर्च बढ़ेगा। राजस्व कमी और बजटीय घाटे की भरपाई के लिए सरकार आरबीआई पर समय से पहले लाभांश भुगतान का दबाव बना सकती है। वहीं, अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए ब्याज दरों में कटौती भी की जा सकती है।