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कर्नाटक विधानसभा चुनाव: BJP का प्लान A और B तैयार, 8 दिन में PM मोदी बदलेंगे तस्वीर

Wed, 18 Apr 2018 09:06 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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मोदी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री येदुरप्पा - फोटो : ANI
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कर्नाटक में भाजपा की उम्मीद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चुनाव प्रचार और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा बिठाए जा रहे समीकरण हैं। प्रधानमंत्री राज्य में 29 अप्रैल से चुनाव प्रचार के लिए उतरेंगे। 30 जिले वाले कर्नाटक में वह हर रोज दो जनसभाएं करेंगे। इस तरह से प्रधानमंत्री 29 अप्रैल, एक, तीन, पांच, छह, सात और आठ मई को कर्नाटक में होंगे। 12 मई को 224 विधानसभा सीटों वाले राज्य में मतदान होगा और 15 मई मतगणना होगी। पार्टी को प्रधानमंत्री के इस चुनाव प्रचार से काफी उम्मीदें हैं। 
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प्रधानमंत्री को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुख्य चेहरा बनाने के साथ-साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य में बदलाव के लिए कड़ी मेहनत की है। कर्नाटक में भी बूथ प्रबंधन से लेकर पन्ना प्रमुखों तक को तैयार करने की कोशिश हुई है। कर्नाटक के प्रभारी मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर हैं। राज्य विधानसभा चुनाव की अहमियत को देखते हुए भाजपा अध्यक्ष की रणनीति को सफल बनाने के लिए प्रकाश जावड़ेकर पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के साथ तालमेल बिठाकर ऐड़ी चोटी का जोर लगाया है। अमित शाह ने भी कर्नाटक की चुनाव तैयारियों के लिए खासा समय दिया है। माना जा रहा है कि उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद राज्य में बदलाव के लिए वह पार्टी को चुनाव में जीत दिलाने के आखिरी अभियान में जुटेंगे। 

आखिरी सप्ताह में बदलेगा समीकरण 

पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि चुनाव मतदान के आखिरी सप्ताह में राज्य में चुनावी समीकरण बदलेगा। भाजपा का प्रभाव भी साफ दिखेगा। इसे केन्द्र में रखकर ही प्रधानमंत्री का चुनाव प्रचार का कार्यक्रम तैयार किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री दक्षिणी कर्नाटक के कोलार, रायचुर में जनसभा को संबोधित करेंगे। एक मई को बेल्लारी, बेलगावी में तीन मई को चामराज नगर, उड्डुपी में, पांच मई को जामाखंडी, बेंग्लुरू, छह मई को कलबुर्गी, हुब्बली, सात मई को शिवमोंगा, तुमकुरु में और आठ मई को मंगुलरू, बेंग्लुरू में जनसभा को संबोधित करेंगे। भाजपा उत्तरी कर्नाटक में काफी मजबूत स्थिति में है। वह अपने आधार को यहां लगातार धार दे रही है। 
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भाजपा अध्यक्ष साध रहे हैं समीकरण 

भाजपा ने अब तक 154 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। पार्टी ने इसमें खास दांव लिंगायतों पर लगाया है। राज्य में लिंगायत 90-100 सीटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। इसे ध्यान में रखर पार्टी के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के अलावा पार्टी ने अन्य नेताओं पर खासा ध्यान दिया है। इसके अलावा बेल्लारी, चित्रदुर्गा, रायचुर में भी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बड़ा यू टर्न लिया है। बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं के सॉफ्ट कार्नर रखना शुरू कर दिया है। जबकि महीने भर पहले ही अमित शाह ने बेल्लारी बंधुओं से पार्टी का कोई नाता न होने का बयान दिया था। गली जनार्दन रेड्डी को बेल्लारी से, ग्रामीण बेल्लारी से सन्ना फकीरप्पा समेत तीन रेड्डी कुनबे को टिकट दे दिया है। रेड्डी बंधुओं को टिकट दिलाने में भाजपा के सांसद श्रीरामुलु की पर्दे के पीछे से अहम भूमिका रही है। श्रीरामुलु गली जनार्दन रेड्डी के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। श्रीरामुलु का चित्रदुर्गा, रायचुर और बेल्लारी में अच्छा खासा प्रभाव है। इसी तरह से भाजपा वोक्कालिग्गा समुदाय को भी साधने में लगी है। 
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खेल तो जेडी(एस) तय करेगा

HD deve gowda - फोटो : amar ujala
कर्नाटक विधानसभा चुनाव-2018 में जद(एस) अहम भूमिका में आ गया है। प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के चेहरे पर चुनाव लड़ रही पार्टी को जहां बहुजन समाज पार्टी ने समर्थन दिया है, वहीं  असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन(एआईएमएआईएम) ने भी जद(एस) को अपना समर्थन दे दिया है। ऐसे में जद(एस) को वोक्कालिग्गा के साथ-साथ अल्पसंख्यक, दलित वोटों के मिलने की संभावना बढ़ रही है। वोक्कालिग्गा भी राज्य में लिंगायतों के बाद दूसरे नंबर का प्रभाव रखते हैं। वोक्कालिग्गा राज्य के किसानों में आते हैं।

हालांकि कांग्रेस पार्टी के पास कृष्णा वी गौड़ा जैसा धाकड़ नेता भी है, लेकिन वोक्कालिग्गा को लुभाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री एचडीदेवगौड़ा सबसे प्रभावी हैं। देवगौड़ा की पार्टी पिछले 10 साल से सत्ता से दूर है और कर्नाटक के मंड्या, हासन, मैसूर, कोलार, चिकमंगलूर जैसे जिलों में अच्छा प्रभाव रखती है। राज्य की राजनीति को समझने वालों के अनुसार जद(एस) की जितनी सीटें बढ़ेंगी उतना ही कांग्रेस की बहुमत के करीब पहुंचने की संभावना धूमिल होगी। इससे भाजपा को भी परोक्ष रूप से लाभ होगा। 

प्लान ए और प्लान बी 

कर्नाटक की राजनीति को समझने वाले सूत्र बताते हैं कि भाजपा की दोहरी रणनीति साफ समझ में आ रही है। पार्टी की पहली कोशिश भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की है। वह इसे केन्द्र में रखकर प्रत्याशियों को टिकट, जातिगत समीकरण का गणित सब बिठा रही है। इसके साथ-साथ कांग्रेस को राजनीतिक लाभ से दूर रखने के लिए वह अन्य विकल्पों को भी अजमा रही है। माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे से भाजपा इस प्लान बी पर काम कर रही है। कुल मिलाकर भाजपा का उद्देश्य हर हाल में राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद  कांग्रेस को सत्ता से दूर रखना सुनिश्चित करना है।
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