प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अचानक लेह का दौरा किया और जवानों से मिलकर उनकर हौसला बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने लेह स्थित अस्पताल का भी दौरा किया और वहां भर्ती जवानों से उनका हाल जाना। इस दौरान अस्पताल में ली गई उनकी तस्वीर को लेकर विवाद हो रहा है।
हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे विवाद को बेबुनियाद बताते हुए सभी आरोपों को निराधार बताया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि तीन जुलाई को लेह के जनरल अस्पताल दौरे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कुछ लोगों द्वारा दुर्भावनापूर्ण और निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। यहां यह स्पष्ट करना होगा कि पीएम ने जहां का दौरा किया, वह अस्पताल का एक हिस्सा है।
मंत्रालय ने कहा, 'यह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि सशस्त्र बलों के साथ कैसे व्यवहार किया जाता है, इसको लेकर शक किया जा रहा है। सशस्त्र बल अपने कर्मियों को सर्वोत्तम उपचार देते हैं। जिस सुविधा का पीएम ने दौरा किया था, वह जनरल अस्पताल का हिस्सा है। कोरोना संकट को देखते हुए यहां 100 बिस्तरों का प्रबंधन किया गया था।'
रक्षा मंत्रालय ने आगे कहा कि इन बहादुर जवानों को गलवां घाटी से लौटने के बाद यहां रखा गया था ताकि इन्हें कोविड क्षेत्रों से दूर रखा जा सके। सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे और सेना के कमांडर ने भी उसी स्थान पर घायल बहादुरों से मुलाकात की थी।
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बता दें कि लेह में सेना का अस्पताल 1962 से भी पहले से मौजूद है और यहां 300 बिस्तरों की सुविधा मौजूद है। वहीं, कुछ लोगों का मानना था कि प्रधानमंत्री ने गलवां घाटी में झड़प के दौरान घायल हुए जवानों से मिलने की इच्छा जताई, इसलिए एक कॉन्फ्रेंस रूम को वार्ड में तब्दील किया गया था।
दरअसल, सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के अस्पताल दौरे की तस्वीरें सामने आने पर लोगों ने सवाल उठाया था कि क्या पीएम ने जिस जगह का दौरा किया था, वो अस्पताल ही था या कुछ और। हालांकि, अब रक्षा मंत्रालय का बयान सामने आने के बाद यह बात साफ हो चुकी है।