बैठक के एजेंडे पर गुपकार ने खुलकर भले ही कुछ न कहा हो, लेकिन उनकी मांग रहेगी कि अनुच्छेद 370 को दोबारा से बहाल किया जाए। दूसरा, परीसीमन प्रक्रिया में सभी राजनीतिक पार्टियों के सुझावों पर अमल हो। तीसरा, जम्मू-कश्मीर को पहले की तरह पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। विकास के मौजूदा पैटर्न में कुछ बदलाव किए जाएं, जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अलावा निजी क्षेत्र में अवसर बढ़ाए जाएं। जम्मू-कश्मीर के विभाजन जैसे किसी प्रस्ताव का विरोध किया जाएगा।
मनमोहन सिंह ने कराई इन नेताओं की तैयारी
पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर उनकी तैयारी कराई है कि वे बैठक में क्या बोलेंगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है, 'यहां पर एक बात साफ है कि कांग्रेस पार्टी 'गुपकार' नेताओं से दूरी बनाकर कोई बातचीत नहीं करेगी। यानी बैठक में कांग्रेस ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं रखेगी, जिस पर गुपकार को आपत्ति हो।'
पीपुल्स एलायंस फार गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) के एजेंडे में अलगाववादियों के साथ बातचीत शुरू करना, राजनीतिक तौर पर बंदी बनाए गए लोगों की रिहाई और कश्मीर के साथ वित्त, नौकरियों एवं विकास के दूसरे मामलों में कोई भेदभाव न बरतना भी शामिल है। परीसीमन को लेकर 2011 की जनगणना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ पार्टियां चाहती हैं कि परीसीमन 2021 की जनगणना पर हो, पीएम के सामने इस मुद्दे पर भी बातचीत हो सकती है।
कहा- इन लोगों की नहीं हो पा रही मदद
इस बैठक में जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी द्वारा जम्मू-कश्मीर के लिए 'कॉन्फेडरेशन ऑफ जम्मू-कश्मीर' यानी अलग-अलग प्रांतीय विधानसभाओं के गठन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके तहत एक उच्च न्यायालय रहे, एक राज्यपाल हो और वित्त व्यवस्था अलग-अलग रहे। पार्टी का कहना है कि जम्मू कश्मीर के संपूर्ण विकास के लिए यह जरूरी कदम है। अभी तक नौकरियां और विकास का पैसा, कश्मीर में ही जाता रहा है। पश्चिम पाकिस्तान से आए लोगों की मदद नहीं हो पा रही है। 1965 और 1971 की लड़ाई में जिन लोगों की जमीन खाली कराई गई थी, उन्हें भी कुछ नहीं मिला है।
अप्रवासी लोग, जो आतंकियों के चलते कश्मीर से जम्मू में आकर बस गए हैं, उनकी वापसी और कश्मीरी पंडितों का मुद्दा भी पीएम की बैठक में उठेगा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा विकास का डाटा बैठक में रख सकते हैं। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आ गई है। आतंकी घटनाओं पर भी नियंत्रण हो रहा है। ईडी और एनआईए ने आतंकियों के कई मददगारों का पता लगाया है। आतंकियों के सामने नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है। पिछले दिनों जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने आए थे तो यह अफवाह फैल गई कि सरकार जम्मू कश्मीर का विभाजन करने जा रही है।