नई शिक्षा नीति का मसौदा लाने के बाद मोदी सरकार जल्द से जल्द नई शिक्षा नीति लागू कराने को लेकर बेहद गंभीर है। खुद पीएम मोदी इस मामले में व्यक्तिगत स्तर पर रुचि ले रहे हैं तो मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक इसे जल्द लागू कराने की संभावना तलाशने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं। पीएम की इच्छा देश की शिक्षा पद्धति को रट्टा मार प्रवृत्ति और अंकों की होड़ से बाहर निकालने की है।
देश में बीते 33 सालों से शिक्षा पद्धति के ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अगर पेश किए गए मसौदे को स्वीकार किया गया तो देश की शिक्षा पद्धति से रट्टा मार संस्कृति खत्म हो जाएगी। शिक्षक छात्रों की समझ, विषय के बारे में जानकारी और रुचि के आधार पर मूल्यांकन करेंगे। स्कूली शिक्षा के दौरान ही छात्रों को उनकी रुचि के विषय का विशेषज्ञ बनाने का रास्ता साफ होगा। संयुक्त प्रवेश परीक्षा पद्धति लागू होने के कारण अलग-अलग विषय में प्रवेश के लिए कई बार प्रवेश परीक्षा होगी। इससे अंकों की होड़ पर लगाम कसी जा सकेगी।
कार्यभार संभालने के बाद निशंक मंत्रालय की कार्यसंस्कृति बदलने पर खासा जोर दे रहे हैं। तनाव मुक्त और स्वस्थ माहौल बनाने के लिए निशंक खुद अधिकारियों के पास जाकर उन्हें फूल भेंट कर रहे हैं। कुलपतियों, केंद्रीय विद्यालयों के प्राचार्यों को बिना दबाव में बेहतर अध्ययन का माहौल बनाने का सुझाव दे रहे हैं।