सेनाध्यक्ष जनरल विपनि रावत रक्षा प्रदर्शनी में आगे बढ़ रहे थे। अचानक एटीएल के स्टाल पर पहुंचे और वहां पोर्टेबल, मोबाइल बंकर देखर ठिठक गए। बंकर में गए पूरी जानकारी ली और निकल आए। बताया गया कि यह बंकर दुश्मन के गोलियों की बौछार रोकने में 360 डिग्री तक सक्षम है।
सेनाध्यक्ष को यह स्नैपफिट बुलेट प्रूफ बंकर की तकनीक पसंद आई, क्योंकि पाकिस्तान से लगती सीमा पर आए दिन हो रही आतंकी घुसपैठ के खात्मे के लिए हो रही मुठभेड़ में सेना को ऐसे बंकरों की जरूरत है। डीआरडीओं के छोटे-छोटे रोबोट, जो घर, बिल्डिंग या दुरूह इलाकों में जाएंगे और खुद दुश्मन का खाका जुटा लाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसी तरह की सैन्य तकनीक और रक्षा साजो-सामान से रु-ब-रू हुए।
इसी तरह से प्रधानमंत्री 2014 में डीआरडीओ प्रयोगशाला में गए थे। डा. राकेश कुमार शर्मा (डिफेंस फूड रिसर्च लैब) के अनुसार प्रधानमंत्री ने सियाचिन, बेसकैंप जैसे दुरूह स्थानों पर तैनात सैनिकों के लजीज खाने के स्वाद को बनाए रखने के लिए तकनीक विकसित करने की इच्छा जताई थी। ताकि वह ताजी सब्जियों को खा सकें। उनके लिए वहां भेजे गए अंडे गिरे तापमान के प्रकोप से न फूटें। डॉ. शर्मा ने बताया कि दो साल के भीतर हमने यह तकनीक विकसित कर ली है। वह डिफेंस एक्सपो-2018 में लेकर आए हैं।
स्नैपफिट बंकर
तकनीक विदेश की है और इस बंकर के सभी पार्ट को निकाल कर कहीं भी ले जाया सकता है। स्क्रू बेस्ट बंकर को कही भी किसी भी सतह पर चंद समय में फिट किया जा सकता है। इसके चारों तरफ लगे बुलेट प्रूफ पारदर्शी विंडो से दुश्मन पर नजर रखी जा सकती है और उसे निशाना बनाकर उड़ाया जा सकता है। एक छोटे से सैन्य वाहन या फिर सैनिकों के माध्यम से बंकर को कहीं भी ले जाया सकता है।
एक्सपो में पहली बार इसे पेश किया गया है। अमेरिका की कोरसोल कंपनी के सहयोग से एटीएल इसे लेकर आई है और तकनीकी हस्तातरण प्रक्रिया के तहत इसे देश में ही तैयार किया जाएगा। इस बंकर में सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत ने रुचि दिखाई है। उन्हें कोलैप्सेबल सैंडफिल बंकर भी ठीक लगे हैं। स्नैपफिट बंकर के बारे में कंपनी का दावा है कि यह एसएलआर, एके-47 समेत, राकेट लांचर आदि के हमलो को झेल लेगा।