चीन को लेकर जयशंकर ने कहा, यह वास्तविकता है कि ये दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत निकटतम पड़ोसी है। लेकिन ये भी है कि इसके साथ हमारा एक कठिन इतिहास, संघर्ष और बहुत बड़ा सीमा विवाद रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री के हाल के मिलाने की विपक्ष की आलोचना को खारिज किया और कहा कि मोदी चीन पर बहुत दृढ़ रहे हैं। उन्हें चीन-भारत सीमा पर हमारी सेना की मजबूत तैनाती से आंका जाना चाहिए।
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चीन को लेकर जयशंकर ने कहा, यह वास्तविकता है कि ये दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत निकटतम पड़ोसी है। लेकिन ये भी है कि इसके साथ हमारा एक कठिन इतिहास, संघर्ष और बहुत बड़ा सीमा विवाद रहा है। एक समाचार समूह के शिखर सम्मेलन में शिरकत करते हुए जयशंकर ने कहा कि चीन से निपटने का सही तरीका दृढ़ रहना है।
इसके अलावा सुरक्षा परिषद से लेकर आतंकियों पर प्रतिबंध जैसे कई मुद्दों पर वह हमारा समर्थन नहीं करते हैं। इसके अलावा पाकिस्तान केसाथ संबंध का असर भारत की सुरक्षा पर होता है।
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जयशंकर ने अर्थव्यस्था की वास्तविकता को लेकर कहा कि साल 1988 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी चीन गए थे, तो उस समय भारत और चीन की अर्थव्यवस्था बराबर थी। लेकिन आज वह अर्थव्यवस्था हमसे चार से साढ़े गुना ज्यादा बड़ी है। उस समय आर्थिक सुधारों की जो शुरुआत हुई, वह आधे-अधूरे तरीके से हुई।
इस महीने की शुरुआत में इंडोनेशिया की राजधानी बाली में जी-20 का शिखर सम्मेलन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक दूसरे से हाथ मिलाते हुए नजर आए थे। इसको लेकर विपक्षी दलों ने आलोचना की थी।
विदेश मंत्री ने कहा, मुझे लगता है कि कुछ लोग हैं जो इस तरह की स्थिति ले सकते हैं, खासतौर पर अगर वे जिम्मेदारी से मुक्त हैं। जयशंकर ने कहा, यह आजाद देश हैं और लोगों को कुछ भी कहने का अधिकार है। मुझे लगता है कि जिम्मेदार और समझदार लोग इस बात जानते हैं कि भारत का एक नेता किस तरह व्यवहार करता है।